मिहींपुरवा (बहराइच)। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के चलते मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र हिंसक जानवरों से प्रभावित है। यहां आए दिन बाघ, तेंदुए व हाथी आदि के हमले होते रहते हैं। यहां हिंसक जानवर सबसे ज्यादा बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं।
बावजूद इसके प्राथमिक विद्यालय परवानी गौढ़ी वार्ड नंबर- 13 का विलय एक किलोमीटर दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय परवानी गौढ़ी प्रथम में कर दिया गया है। इससे 45 छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। रास्ते में नौनिहालों पर हिंसक जानवरों के हमले के चलते जहां कुछ अभिभावकों ने अपने बच्चों का नाम निजी स्कूल में करवा दिया है, तो कई लोगों ने बच्चों को घर बैठा दिया है।
कुछ अभिभावक ऐसे हैं जो बच्चों को खुद स्कूल छोड़ने व लाने जा रहे हैं। घर बैठे स्कूल पर लगे ताले को देख-देख कर स्कूल के खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
रास्ते में हिंसक जानवरों का खतरा
परवानी गौढ़ी वार्ड नंबर 13 निवासी विजय कुमार ने बताया कि कुछ बच्चे पैदल ही पढ़ने के लिए प्राथमिक विद्यालय परवानी गौढ़ी प्रथम जाते हैं। इस दौरान रास्ते में हिंसक जानवर के हमले की आशंका बनी रहती है। इससे सभी परेशान रहते हैं और कई बच्चों का स्कूल जाना छूट सकता है।
निजी स्कूल में करा दिया दाखिला
नयापुरवा निवासी आदम ने बताया कि शासन ने बच्चों की संख्या कम बताकर स्कूल बंद कर दिया और एक किमी दूर के स्कूल में विलय कर दिया है, लेकिन रास्ते में हिंसक जानवरों के हमले के संबंध में विचार नहीं किया। मैंने अपने बेटे का दाखिला निजी स्कूल में करवा दिया है। बेटे की सुरक्षा को लेकर रिश्क नहीं लिया जा सकता।
अभिभावकोंं की परेशानी बढ़ी
परवानी गौढ़ी निवासी राजेश ने बताया कि रास्ते के जोखिम को देखते हुए अभिभावकों का बच्चों का स्कूल छोड़ना मजबूरी बन गया है। पहले बच्चे अकेले ही स्कूल चले जाते थे, लेकिन अब प्रतिदिन छोड़ना व लाना मजबूरी हो गई है। इससे अभिभावक परेशान हैं और बच्चों की नियमित पढ़ाई बंद हो जाएगी।
ज्यादातर बच्चे पढ़ने जा रहे हैं स्कूल
शासन द्वारा निर्धारित मानक संख्या से कम मिलने पर परवानी गौढ़ी के प्राथमिक विद्यालय वार्ड नंबर 13 का परवानी गौढ़ी प्रथम में मर्जर कर दिया गया है। ज्यादातर बच्चे स्कूल पढ़ने जा रहे हैं। अगर कोई बच्चा नहीं जा रहा है, तो उसके अभिभावक को समझाया जाएगा।
-अजीत सिंह, खंड शिक्षाधिकारी