बहराइच। सीमावर्ती जनपद बहराइच के लिए बड़ी खुशखबरी है। नेपाल सीमा से सटे तीन ब्लॉकों के 34 गांव अब वाइब्रेंट विलेज के रूप में विकसित किए जाएंगे। करीब 1.02 अरब रुपये की लागत से इन गांवों की सूरत व सीरत बदलेगी। लगभग तीन करोड़ रुपये खर्च कर हर गांव को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। जिला प्रशासन ने कार्ययोजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी है, जिससे आने वाले महीनों में बदलाव साफ दिखने लगेगा।
केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से संचालित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का उद्देश्य सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों को बुनियादी और आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है। पहले चरण में नेपाल सीमा से सटी 34 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है। इनमें से 31 ग्राम पंचायतें मिहींपुरवा विकासखंड, दो नवाबगंज और एक रिसिया की शामिल हैं।
मुख्य विकास अधिकारी मुकेश चंद्र ने विशेष बातचीत में बताया कि चयनित ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों की आय वृद्धि, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट को प्राथमिकता दी जाएगी। योजना का फोकस सिर्फ निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण पर भी होगा।
एसएसबी और वन विभाग से समन्वय
सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण प्रशासन एसएसबी और वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित करेगा। उद्देश्य है कि सुरक्षा, वन क्षेत्र से जुड़ीं समस्याएं और ग्रामीणों की शिकायतों का त्वरित समाधान हो सके। इससे विकास कार्यों में पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित होंगी।
आमजन के लिए क्या बदलेगा
इस पहल से सीमावर्ती गांवों के लोगों को सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में सहूलियत मिलेगी। युवाओं को स्थानीय स्तर पर कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलेंगे, महिलाओं के स्वयं सहायता समूह मजबूत होंगे। बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण भी मिलेगा।
ग्रामीणों को मिलेंगी ये सुविधाएं
- बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और आवागमन की सुगमता।
- इंटरनेट, टेलीकॉम और टीवी कनेक्टिविटी का विस्तार।
- 24 घंटे बिजली, स्वच्छ पेयजल और ऊर्जा सुविधाएं।
- स्कूलों में स्मार्ट क्लासेस और डिजिटल शिक्षा।
- प्रत्येक गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना।
- आवासीय विद्यालय, अस्पताल, पुलिस चौकी और सामुदायिक केंद्र।
- पर्यटन, कौशल विकास और स्थानीय रोजगार सृजन।
- एनआरएलएम समूहों की सक्रियता बढ़ाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना।