जिले में बाढ़ के हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। महसी क्षेत्र के आठ गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। इन गांवों की करीब तीन हजार आबादी को 48 घंटे से भोजन नहीं मिल पाया है। खाने व पानी के लिए ग्रामीण प्रशासन से आस लगाए बैठे हैं लेकिन कोई अधिकारी प्रभावित गांवों के करीब भी नहीं पहुंचा है।
वहीं दो अन्य गांवों की 500 आबादी पलायन कर बेलहा-बेहरौली तटबंध पर जा पहुंची है। अन्य परिवार भी पलायन के लिए मजबूर हैं। इस बीच महसी और कैसरगंज के 17 और गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। इसके साथ ही बाढ़ की चपेट में आए गांवों की संख्या 43 हो गई है।
बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए गोंडा से फ्लड पीएसी बुलाई गई है। उधर कैसरगंज के जरवल में पुरैनी-सुंदरपुरवा मार्ग पर तीन फुट पानी चल रहा है। आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।
घाघरा नदी उफनाने के चलते महसी और कैसरगंज क्षेत्र में बाढ़ से हालात काफी खराब हो गए हैं। खतरे के निशान से घाघरा का पानी 64 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने से नदी के उस पार बसे पचासा, चमरही, अहिरनपुरवा, पचदेवरी, रामदहिनपुरवा, राजबलीपुरवा, कोनीपुरवा, मंगलपुरवा के मकानों में तीन से चार फिट तक पानी भर गया है।
इसके चलते लोग छत-छप्पर पर शरण लिए हुए हैं। लगभग तीन हजार परिवार 48 घंटे से भोजन के बिना बैठे हैं। महिलाएं और बच्चे खाने और पानी के सामान के लिए प्रशासन की ओर आस लगाए हैं। बाढ़ के चलते गोलागंज और कायमपुर गांव के करीब 500 परिवार पलायन कर चुके हैं।
इन परिवारों के लोगों ने बेलहा-बेहरौली तटबंध पर डेरा जमाया है। एडीएम विद्याशंकर सिंह के पहुंचने के बाद मंगलवार को तहसील प्रशासन ने तटबंध पर पड़े लोगों को तिरपाल और लंच पैकेट का वितरण किया गया।
वहीं जलस्तर में इजाफा होने के चलते घुरेहरीपुर, भौंरी, सिपहिया, अहिरनपुरवा, मल्लाहनपुरवा, समदा, खालेपुरवा, बहोरवा में भी पानी घुस गया है। रास्तों पर तीन से चार फुट पानी होने के चलते लोग घरों से निकल नहीं पा रहे।
कैसरगंज के सुंदरलालपुरवा-पुरैनी मार्ग पर घाघरा के उफान से साढ़े तीन फिट पानी बह रहा है। इसके चलते आवागमन अवरुद्ध हो गया है। उस पार बसे जुमेरपुर और सुंदरलालपुरवा गांव का संपर्क ब्लाक तथा जिला मुख्यालय से कट गया है।