बहराइच। सरयू नदी ने बाबा मेला और मास्टरपुरवा गांव में कटान तेज कर दी है। 24 घंटे में 30 ग्रामीणों के मकान नदी में कटकर समा गए, जबकि खेती योग्य जमीन भी नदी में समा गई है। संपर्क मार्ग बंद हैं, जबकि महसी, मोतीपुर, कैसरगंज और नानपारा तहसील के 60 गांवों में अब भी बाढ़ का पानी भरा है। ग्रामीण खानाबदोश की तरह जीवन गुजार रहे हैं।
महसी में सरयू नदी ने कटान तेज कर दी है। महसी तहसील कीग्राम पंचायत मांझा दरिया बुर्द के मजरा बाबापुरवा और मास्टर पुरवा गांव की 300 मीटर जमीन कट गई है। 24 घंटे के अंदर 30 ग्रामीणों के मकान कटकर नदी में समा गए। इसके अलावा सैकड़ों बीघा जमीन भी ग्रामीणों की नदी में बह गई। कटान को लेकर ग्रामीणों में दहशत है। लेकिन प्रशासन की ओर से बचाव के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
तहसील क्षेत्र के मैकूपुरवा, पचदेवरी, चुरईपुरवा, अंगरौरा, दुबहा, रामदहिनपुरवा, केवलपुर, चमरहिया, धोबियनपुरवा, पचासा, सिपाहीलालपुरवा, मुंशीलालपुरवा, नईबस्ती चमरहिया, सोमईपुरवा, मगदहनपुरवा, इंदलपुरवा, बलभद्र यादवपुरवा, सुरेश बाबा पुरवा, लालजीपुरवा, लायकपुरवा गांवों में पानी भरा हुआ है। मोतीपुर तहसील के चहलवा, दूधनाथपुरवा, बंगालीपुरवा, जुगुलापुरवा, हनुमानगढ़ी, बंगालीपुरवा, कुड़कुड़ी कुआं, नईबस्ती, लक्खाबाग गांव में बाढ़ का पानी भरा हुआ है।
कैसरगंज और नानपारा तहसील के 14 गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। गांवों में पानी भरा होने के बाद भी प्रशासन द्वारा कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। जिससे ग्रामीणों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। 60 गांव की लगभग 35 हजार की आबादी प्रभावित है। प्रशासन सिर्फ राशन किट वितरण कर इति श्री कर रहा है। दूसरी ओर ग्रामीण दाने-दाने को मोहताज हैं। उपजिलाधिकारी महसी एसएन त्रिपाठी ने बताया कि कटान की सूचना मिली है। राजस्वकर्मियों को भेजा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद सभी पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा।
इन ग्रामीणों के कटे मकान
बाबा मेला और मास्टरपुरवा गांव में महेश, बहादुर, सरजू प्रसाद, राममूरत, रामनिवास, आत्माराम, छत्रपाल, कुलेराज, फेरूलाल, पुष्पेंद्र, राजेंद्र, कैलाश, मुखलाल, अकीम, अशोक, रामसागर, प्रमोद, दुलारे, कुंजबिहारी, गोपाल, विरजेश, अरविंद, दीनदयाल, दिनेश, रमाकांत, मिलन, भिखारी, मंगल पाल और किशोरीलाल समेत 30 से अधिक ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हो गए हैं।