बहराइच। जिले के गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर पिछले सत्र का 3.86 अरब रुपये बकाया है, लेकिन किसानों की समस्या से गन्ना विभाग के साथ मिल प्रशासन पूरी तरह से अंजान बना हुआ है। जिले की दो चीनी मिलों पर 131 करोड़ रुपये बकाया है तो लखीमपुर की दो मिलों पर जिले के किसानों का 2.55 अरब रुपये बकाया है। किसानों को पैसा न मिलने से उनकी खेती प्रभावित हो रही है। गन्ना बकाया भुगतान लेने के लिए हजारों किसान बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनका भुगतान नहीं हो पा रहा है।
जिले के किसान नकदी फसल के रूप में गन्ने की बोआई अधिक मात्रा में करते हैं। लगभग 70 प्रतिशत किसान गन्ने की बोआई करते हैं। इसके लिए चार चीनी मिलें स्थापित हैं। इनमें जरवलरोड में स्थित आईपीएल शुगर मिल, परसेंडी में स्थित पारले मिल, चिलवरिया में शिंभावली और नानपारा में स्थित श्रावस्ती सहकारी चीनी मिल शामिल हैं।
इनमें चिलवरिया व नानपारा चीनी मिल गन्ना भुगतान करने में काफी पीछे है। किसान एक साल कड़ी मेहनत कर गन्ना मिलों को लेकर जाते हैं, लेकिन किसानों को गन्ना देने के बाद भी उन्हें रुपये नहीं मिल रहे हैं। इससे वह काफी परेशान हैं। किसानों को गन्ना का भुगतान न मिलने से घर का खर्च जहां डांवाडोल हो रहा है, वहीं उन्हें खेतों में अन्य फसलों की बोआई करने में परेशानी हो रही है।
आलम यह है कि चिलवरिया चीनी मिल पर किसानों का 114 करोड़ रुपये बकाया हो गया है। जबकि नानपारा में स्थित श्रावस्ती सहकारी चीनी मिल पर किसानों का 17 करोड़ रुपये बीते सत्र का बकाया है। वहीं, लखीमपुर खीरी जिले के खम्हरिया में स्थित ऐरा चीनी मिल में बहराइच के किसानों का 141 करोड़ रुपये तथा निघासन में स्थित खंभारखेड़ा मिल में 114 करोड़ रुपये बकाया है।
किसान घरेलू कार्य में रुपये के लिए बैंक जाते हैं, लेकिन रुपये खाते में न आने के कारण सभी मायूस लौट आते हैं। इसकी शिकायत किसान जिला गन्ना अधिकारी व चीनी मिल के अधिकारियों से करते हैं, लेकिन किसानों की सुनवाई कहीं नहीं हो रही है। ऐसे में चारो तरफ से किसान ही पीड़ित है, लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही है।
इस मामले में जिला गन्ना अधिकारी शैलेष मौर्या से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जिले में दो मिलों पर लगभग 131 करोड़ रुपये बकाया है। इसके लिए मिल के प्रबंधकों को पत्र लिखा गया है। जल्द ही किसानों के खाते में रुपये भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि लखीमपुर जिले की दो मिलों में भी काफी रुपये बकाया है। इसके लिए महाप्रबंधक से बात चल रही है। जल्द ही समस्या का समाधान होगा।
भुगतान न होने से मोतीपुर के पांच हजार किसान परेशान
मोतीपुर तहसील के किसानों का गन्ना तीन वर्ष पहले नानपारा चीनी मिल को जाता था। लेकिन मिल की पेराई क्षमता कम होने व गन्ना अधिक होने पर इस तहसील के किसानों को लखीमपुर में स्थापित मिलों पर गन्ना देने के लिए कहा गया। ऐसे में सुजौली क्षेत्र के लोग खंभारखेड़ा मिल को गन्ना देने लगे। जबकि आधे हिस्से के लोग खम्हरिया में स्थित ऐरा मिल को गन्ना देने लगे। लखीमपुर में स्थापित दो मिलों पर ही गन्ना किसानों का 2.55 अरब रुपये बकाया है।
अब तक ऐसे हुआ भुगतान
जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि जिले के किसानों का खम्हरिया में स्थित मिल में पिछले सत्र में लगभग 444 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा गया। इसमें सिर्फ 303 करोड़ का भुगतान 17 मार्च तक किया गया। जबकि 141 करोड़ रुपये बकाया है। खंभारखेड़ा मिल में 433 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा गया। जबकि भुगतान 319 करोड़ का किया गया। अभी भी 114 करोड़ रुपये बकाया है। इसी तरह नानपारा में 29 अप्रैल के बाद से भुगतान ठप है। यहां पर 17 करोड़ व चिलवरिया चीनीमिल में 114 करोड़ रुपये बकाया है। यहां पर पांच जनवरी के बाद भुगतान नहीं किया गया है।
इस तरह होता है भुगतान
जिला गन्ना अधिकारी शैलेष मौर्या ने बताया कि केंद्र सरकार चीनी मिल खरीद के लिए कोटा निर्धारित करती है। कोटा निर्धारण के अनुसार 15 से 20 हजार क्विंटल चीनी की खरीद एक माह में की जाती है। चीनी बिक्री के बाद ही किसानों को पैसे का भुगतान किया जाता है। ऐसे में चीनी बिक्री होने पर रुपये मिलते ही मिल प्रबंधक किसानों के खाते में बजट भेज देंगे।
मिलों को यह मिला कोटा
जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के अनुसार नवंबरमें चीनी बिक्री के लिए चिलवरिया को 1176 टन, नानपारा को 3565 टन, खंभारखेड़ा को 9806 और ऐरा मिल को 11256 टन चीनी बिक्री का लक्ष्य मिला है। चीनी बिक्री होने पर 85 प्रतिशत का भुगतान किसानों को व 15 प्रतिशत कर्मचारियों तथा जीएसटी पर व्यय होगा।