बहराइच/महसी। तराई के लोग झमाझम वर्षा का इंतजार ही करते रह गए। वहीं, नेपाल के पहाड़ों पर हो रही निरंतर वर्षा के कारण घाघरा फिर उफना गई है। महसी के निचले इलाकों में बसे आठ गांवों को नदी ने घेर लिया है।
भयावह स्थिति हो गई है। ऊंचे इलाकों मेें भी पचदेवरी के पास नदी का पानी फैलने लगा है। इससे हड़कंप मचा हुआ है। करीब 35 हजार आबादी नदी के पानी से घिर गई है। एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी निरंतर लाल निशान की ओर बढ़ रही है।
चार सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से जलस्तर में इजाफा हो रहा है। तीन बैराजों से 2.59 लाख क्यूसेक पानी घाघरा में छोड़ा गया है। इससे शुक्रवार सुबह स्थिति और गंभीर होने के संकेत मिल रहे हैं। अभी तक राहत व बचाव कार्य शून्य हैं।
जिला सूखे की चपेट में जरूर है। लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर हो रही वर्षा से घाघरा नदी उफान पर है। गुरुवार शाम छह बजे एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 105.556 मीटर मापा गया।
यह जलस्तर खतरे के निशान से महज 51 सेंटीमीटर दूर है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के के मुताबिक चार सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से नदी के जलस्तर में इजाफा हो रहा है।
महसी तहसील के निचले इलाके में बसे मंगलपुर, लठौरनपुरवा, धोबिनपुरवा, मैनापुरवा, सांवलपुरवा, कायमपुर, बांसगढ़ी नईबस्ती, टिकुरी, गोलागंज, मुरौवा मुंसारी, पिपरा और कोढ़वा गांव के निकट नदी उफना गई है।
पचदेवरी गांव के पास नदी का पानी तेजी से मैदानी इलाकों में फैल रहा है। इससे ये गांव पानी से घिर गए है। अफरातफरी मची हुई है। इन गांवों की लगभग 35 हजार की आबादी प्रभावित है।
कैसरगंज तहसील के जरवल विकासखंड क्षेत्र में भी नदी के जलस्तर में इजाफा से तटवर्ती गांव के ग्रामीणों में अफरातफरी की स्थिति है। लेकिन अभी तक राहत व बचाव के कोई उपाय नहीं किए गए हैं।
95 बीघा खेत नदी में समाए
घाघरा में उफान के साथ ही कटान भी तेज हो गई है। पिपरी, गोलागंज और बांसगढ़ी में एक मकान और 95 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समाहित हुई है। नदी के उफान व कटान के कारण लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या करें।
नदी में छोड़ा गया 2.59 लाख क्यूसेक पानी
चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज के अवर अभियंता संतराम वर्मा ने बताया कि नेपाल के पहाड़ों पर हुई वर्षा से नेपाली नदियां उफना गई हैं। तीन बैराजों से गुरुवार को 2.59 लाख क्यूसेक पानी घाघरा में छोड़ा गया है।
गिरिजापुरी बैराज से 88 हजार 783 क्यूसेक, बनबसा बैराज से एक लाख 31 हजार क्यूसेक और शारदा बैराज से 39391 क्यूसेक पानी घाघरा में छोड़ा गया है।
जिले के महसी और कैसरगंज क्षेत्र में इस पानी को पहुंचने में 24 घंटे लगते है। ऐसे में शुक्रवार सुबह तक पानी के पहुंचने पर स्थिति और भयावह होने के संकेत मिल रहे हैं। बेलहा-बेहरौली और आदमपुर रेवली तटबंध के उस पार का हिस्सा पूरी तरह पानी से घिरने की आशंका है।
अलर्ट की गईं बाढ़ चौकियां
महसी के तहसीलदार राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि बैराज से घाघरा में पानी छोड़े जाने की सूचना मिली है। जिस पर नजर रखी जा रही है। सभी 36 बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं।
राजस्वकर्मियों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में कैंप करने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ की टीम पहले ही महसी पहुंच चुकी है। बेलहा-बेहरौली तटबंध पर लंगर चलवाया जाएगा।
बाढ़ की तैयारी का प्रशासनिक दावा
तहसील बाढ़ चौकी प्रभावित होने वाले गांव नाव लंगर स्थल
महसी 14 62 114 4
कैसरगंज 07 38 502 15
नानपारा 15 106 128 15
नोट : 184 गोताखोर और 10 मोटरबोट की व्यवस्था प्रशासन के पास है। इनमें आठ मोटरबोट कैसरगंज और दो महसी में है।