घाघरा के जलस्तर में गिरावट के साथ कटान बढ़ रही है। महसी और कैसरगंज क्षेत्र में सोमवार रात से 21 और मकान नदी की लहरों में समा गए। 60 बीघा खेत भी कटान की भेंट चढ़ गए। इससे जनजीवन अस्तव्यस्त है। ग्रामीण लगातार पलायन कर रहे हैं।
घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। चार दिन से घघरा का जलस्तर घट-बढ़ रहा है। मंगलवार को एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से 26 सेमी ऊपर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश साहनी ने बताया कि नदी में खतरे का निशान 106.07 है।
मंगलवार दोपहर जलस्तर 106.336 मीटर रिकॉर्ड किया गया। जलस्तर फिर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। उधर नदी के जलस्तर में उतार चढ़ाव के चलते महसी क्षेत्र में कटान तेज हो गई है। नदी गोलागंज टेपरी गांव के निकट महसी में कटान कर रही है।
गोलागंज टेपरी निवासी मिश्रीलाल, भारत, कंधई, देशसराज, प्रमेाद, प्रकाश, राम नरेश, बलदेव, बरसाती, अमरचंद्र, मोतीलाल समेत 14 लोगों के मकान नदी में समा गए।
कैसरगंज के गोड़हिया नंबर तीन की नई आबादी में कटान के चलते राकेश, सियाराम, रामू, श्यामू, जगत, राजेंद्र, रमेश व मुन्नी देवी के मकान नदी में समाहित हो गए।
हालात यह है कि गृहस्थी को सहेजने के लिए ग्रामीण अपने आशियाने उजाड़ने को मजबूर हैं। कटान की तेजी से ग्रामीणों में दहशत है। नायब तहसीलदार अहमद फरीद ने टीम के साथ गोड़हिया नंबर तीन का दौरा कर कटान का जायजा लिया। प्रभावित लोगों को तिरपाल दिया। ग्राम प्रधान राजरानी वर्मा की ओर से कटान पीड़ितो के लिए भोजन की व्यवस्था करायी गयी है।