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सीएचसी में मरीजों का इलाज भगवान भरोसे

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बहराइच। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। नानपारा सीएचसी पर एक चिकित्सक साल भर तो दूसरा 15 दिन से गायब है। कैसरगंज में डेढ़ साल से एक्सरे मशीन खराब है।
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सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर गंदगी ऐसी कि वहां बैठना दुश्वार है। पयागपुर सीएचसी में महिलाओं के वार्ड में कबाड़ भरा हुआ है। नानपारा और कैसरगंज में बुखार में काम आने वाली पैरासिटामॉल और मेनीटॉल तक नहीं है।

अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर भी दवाइयों की भारी कमी है। मरीजों की जिंदगी भगवान भरोसे ही है। सीएचसी पर सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं की खानापूर्ति भर हो रही है।
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जिले में 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। लेकिन इनमें मरीजों की जिंदगी हमेशा दांव पर लगी रहती है। स्वास्थ्य महकमा स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाइयां, समुचित स्टॉफ मुहैया होने का दावा कर रहा है।

लेकिन जब अमर उजाला ने पड़ताल की तो दावों की कलई खुल गई। 14 में से पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का बुरा हाल मिला। कहीं दवाइयां गायब हैं तो कहीं डॉक्टर ड्यूटी से नदारद हैं।

वह भी एक दो दिन से नहीं बल्कि साल भर से। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारी जांच की बात कहकर किनारा कस रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करने का खेल चल रहा है।

केस- 1
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नानपारा
समय 11:45 बजे
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नानपारा परिसर में गंदगी फैली मिली। यहां सीएचसी प्रभारी डॉ. चंद्रभान ड्यूटी पर मरीजों को देखते मिले। लेकिन पता चला कि नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय राय एक साल से ड्यूटी से गायब हैं।

चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव 15 दिन से ड्यूटी पर नहीं आ रहे। कोई अप्लीकेशन भी नहीं है। सर्जन, फिजीशियन और आर्थोपैडिक के पद खाली हैं। रेडियोलॉजिस्ट है नहीं।

एक्सरे मशीन काफी पुरानी है। औषधि भंडार कक्ष पहुंचने पर पता चला कि पैरासिटामॉल दवा एक माह से नहीं है। पेन किलर इंजेक्शन भी खत्म हो चुका है। यहां प्रतिदिन औसतन 500 से 600 मरीज इलाज के लिए आते हैं।

केस- 2
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैसरगंज
समय 12:10 बजे
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों का इलाज होता मिला। लेकिन यहां पर लगी एक्सरे मशीन कक्ष में ताला लटक रहा था। पता चला कि डेढ़ साल से मशीन खराब है।

रैबीज इंजेक्शन अरसे से नहीं है। ऐसे में कुत्ता काटने पर रोगी को जिला अस्पताल का सहारा होता है। दिमागी बुखार में काम आने वाली मेनिटॉल दवा भी सप्ताह भर पहले खत्म हो चुकी है।

पोषण पुनर्वास केंद्र में सिर्फ एक बच्चा भर्ती मिला। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एनके सिंह ने कहा कि दवा की कमी और एक्सरे मशीन के मामले में उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है।

केस- 3
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पयागपुर
समय: 1:15 बजे
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एनबी जायसवाल मरीजों को देखते मिले। बड़े पैमाने पर वार्ड व परिसर में गंदगी मिली। जगह-जगह कूड़ा फैला था।

सीएचसी के महिला वार्ड में एक तरफ टूटे बेडों के कबाड़ का ढेर लगा हुआ था तो दूसरी तरफ महिला रोगी भर्ती दिखी। सभी चिकित्सक ड्यूटी पर मिले। लेकिन पता चला कि सीएचसी में सफाईकर्मी आता ही नहीं।

प्रभारी चिकित्साधिकारी ने बताया कि अनुबंध पर एक सफाईकर्मी को जिला मुख्यालय से भेजा गया था। लेकिन सिर्फ वह एक दिन ड्यूटी पर आया।

यहां भी दवाइयों की कमी मिली। बुखार, जुकाम, खांसी की दवाइयां भी स्टॉक में नहीं मिला। यहां पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित तो जरूर है, लेकिन उसमें ताला लटक रहा है।

केस- 4
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुस्तफाबाद
समय 1:20 बजे
सीएचसी में मरीज भर्ती मिले। लेकिन सभी समुचित दवाएं न मिलने की शिकायत कर रहे थे। गंदगी फैली हुई थी। नेत्र सहायक, डेंटल हाजिनिस्ट, एक्सरे टेक्नीशियन ड्यूटी पर नहीं मिले। बेंच पर मासूम का इलाज होता मिला।

औषधि वितरण कक्ष में पैरासिटामॉल समेत अन्य जीवन रक्षक दवाओं का स्टॉक काफी कम होने की पुष्टि सीएचसी अधीक्षक डॉ. निखिल सिंह ने की। बोले जितने स्टॉक की जरूरत है, उतनी दवाइयां जिले से नहीं मिल पा रही। ऐसे में दिक्कत आ रही है।

केस- 5
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फखरपुर
समय 1:30 बजे
फखरपुर स्वास्थ्य केंद्र में भी गंदगी फैली हुई थी। यहां बनिया गांव निवासी कृष्णावती बैठी मिली। उन्होंने कहा कि डॉक्टर ने आरएल चढ़ाने को कहा है। लेकिन कोई चिकित्साकर्मी मिल नहीं रहा है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सिर्फ एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट मौजूद मिला। पता चला कि अन्य चिकित्सक और चिकित्साकर्मी फील्ड ड्यूटी पर हैं। चिकित्साधीक्षक कक्ष की भी कुर्सी खाली मिली। जबकि मरीजों की भारी भीड़ थी।

अव्यवस्था की कराएंगे जांच
अस्पतालों में अभी तक लोकल परचेज कर दवाओं की आपूर्ति कर दी जाती थी। लेकिन अब लोकल परचेजिंग पर शासन से रोक लगा दी गई है। ऐसे में प्रदेश स्तर पर बनी कमेटी ही दवाओं की आपूर्ति का इंडेंट पास करेगी।

इस मामले में पत्र लिखा गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अव्यवस्था के मामले की जांच कर कार्रवाई करेंगे। जो चिकित्सक अरसे से गायब हैं, उनके मामले में शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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-डॉ. एके पांडेय, मुख्य चिकित्साधिकारी
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