तराई के जनपद में सबसे अधिक ईंट-भट्ठे संचालित हो रहे हैं। इसमें लगभग 20 ईंट-भट्ठे ऐसे हैं, जो सभी मानकों को दरकिनार कर धरती का सीना छलनी कर रहे हैं। इन ईंट-भट्ठों पर शिकंजा कसने के लिए प्रशासन कोई ठोस रणनीति नहीं बना पा रहा है। हालांकि बरसात होने के कारण ईंट-भट्ठे पूरी तरह से बंद पड़े हैं। प्रशासन बारिश के बाद ईंट-भट्ठों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
तराई के जनपद की मिट्टी ईंट निर्माण के लिए काफी उपयोगी है। इसकी उपयोगिता को देखते हुए तराई में बीते दो दशक में लगभग 40 फीसदी ईंट-भट्ठों की संख्या में इजाफा हुआ है। पूर्व में लगभग 175 ईंट-भट्ठे संचालित होते थे। लेकिन वर्तमान समय में इनकी संख्या 225 के करीब पहुंच चुकी है।
बहराइच ईंट निर्माता कल्याण समिति में सभी ईंट-भट्ठे पंजीकृत हैं। जबकि लगभग 20 ऐसे भट्ठे हैं जो मानकों को दरकिनार कर संचालित हो रहे हैं। इन ईंट-भट्ठों पर शिकंजा कसने के लिए प्रशासन कोई ठोस रणनीति भी तैयार नहीं कर पा रहा है। ईंट-भट्ठों पर मानकों को दरकिनार करते हुए 35 से 40 फीट की चिमनी लगाई गई हैं। गांव के बिल्कुल पास संचालित होने के कारण इनसे निकलने वाला धुआं पर्यावरण के साथ ही ग्रामीणों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। कई ईंट भट्ठे ऐसे संचालित हो रहे हैं, जहां जाने के लिए रास्ता भी नहीं बचा है। ईंट निर्माता समिति के महामंत्री मोहम्मद अब्दुल्ला ने बताया कि जिले के लगभग 200 ईंट-भट्ठों को स्वच्छता प्रमाण पत्र जारी हो चुका है। जबकि 25 ईंट-भट्ठों को प्रमाण पत्र दिए जाने की कार्रवाई अंतिम चरण में है।
शहर से सटे नगरौर गांव के बाहर ईंट-भट्ठे का संचालन हो रहा है। गांव जाने वाले मुख्य मार्ग के दोनों ओर ईंट-भट्ठा मालिकों ने लगभग 20 फीट की खोदाई कर दी है। जिसके चलते रास्ते पर जाने वाले ग्रामीणों को दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसकी शिकायत भी कई बार जा चुकी है, लेकिन प्रशासन कोई कदम नहीं उठा रहा है।
एडीएम बहराइच संतोष कुमार राय ने कहा कि ईंट-भट्ठों के द्वारा खोदाई के मानक तय हैं। खोदाई के लिए ईंट-भट्ठा मालिकों को मनमानी करने की छूट नहीं दी जाएगी। वहीं बिना स्वच्छता प्रमाण पत्र के कोई भी भट्ठा संचालित होगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। बरसात के बाद अभियान चलाया जाएगा।