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भरथापुर में नेपाली हाथियों का उत्पात, 150 बीघा फसल रौंदी

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गन्ने और धान की फसल पूरी तरह बर्बाद
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कतर्नियाघाट (बहराइच)। कतर्नियाघाट और सुजौली रेंज में नेपाल से आए हाथियों के झुंड के उत्पात से लोग दहशत में हैं। रात में हाथियों ने भरथापुर और आबां गांव के निकट धान व गन्ना की फसलों को रौंदकर तबाह कर दिया।

ग्रामीण हांका लगाकर हाथियों को भगाने की कोशिश में जुटे रहे, लेकिन सफल नहीं हुए। सूचना रेंज कार्यालय को दी गई। वनकर्मी भी पहुंचे। गोला-पटाखा दागने के बावजूद हाथी भोर तक चिंघाड़ते रहे। लगभग 150 बीघा धान और गन्ने की फसल तबाह हो गई है।
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नेपाल से 25 हाथियों का झुंड अरसा बाद दो दिन पूर्व कतर्नियाघाट के गेरुआ नदी पार जंगलों में पहुंचा है। हाथियों का यह झुंड रात में नदी पार कर किसानों के खेत में घुस जाता है। कभी धान तो कभी गन्ना और केला की फसल को हाथी निशाना बना रहे हैं।

मंगलवार रात हाथियों का झुंड भरथापुर गांव निवासी ग्रामीणों के खेत में पहुंच गया। गांव निवासी पराग, बंधू, गुलजारी, घनश्याम समेत 10 किसानों के धान, गन्ना और केले के खेत में घुसे हाथियों के झुंड ने पूरी फसल को रौंद दिया।

हाथियों की चिंघाड़ सुनकर ग्रामीणों ने मशाल जलाकर उन्हें भगाने की कोशिश की। लेकिन सफल नहीं हुए। रात 12 बजे पहुंचा हाथियों का झुंड भोर में पांच बजे खेतों से खिसका। जाते समय हाथियों ने भरथापुर गांव निवासी परमा की बांस की चहारदीवारी को तोड़ डाला।

किसी तरह परिवार के लोगों ने जान बचायी। वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह का कहना है कि जंगली हाथी काफी हमलावर मुद्रा में होते हैं। उनके सामने जाना ठीक नहीं होता है। गोले-पटाखे दागकर उन्हें भगाया जा सकता है।
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गांव के लोगों को गोले-पटाखे वितरित किए गए हैं। वनकर्मियों की रात्रि गश्त बढ़ा दी गई है। इस समय खेतों में गन्ना तैयार है। ऐसे में हाथी झुंड में खेत में पहुंच जाते हैं। ग्रामीणों को सजग रहने की जरूरत है।
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