डॉक्टरों व दवाइयों की कमी, डेंगू पर कैसे होगा नियंत्रण
जिला अस्पताल में नहीं हैं फिजीशियन, सीएचसी-पीएचसी से मरीजों को कर दिया जाता रेफर
बहराइच। सूरज की तल्खी और हल्की फुल्की बारिश के चलते तराई में संक्रामक रोग पैर पसारने लगे हैं। डेंगू फैलने का भी मौसम आ गया है, लेकिन अब तक तैयारियां शून्य हैं। जिले की 35 लाख आबादी फिजीशियन से वंचित है। आलम यह है कि मरीजों के एकाएक बढ़ने से सीएचसी, पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक स्वास्थ्य सेवाआें का हाल बदतर हो जाता है। वहीं बेड, ड्रिप स्टैंड व दवाआें की कमी भी मरीजों को अखरती है। कराहते और तड़पते हुए रोगी भगवान भरोसे इलाज करवाने को मजबूर होते हैं। ऐसे में डेंगू पर शिकंजा कैसे कसा जा सकेगा, यह बड़ा सवाल है। वहीं, हाईकोर्ट ने इस बार मानसून सत्र लागू होने पर डेंगू व चिकनगुनिया से निपटने के लिए विभाग से तैयारियों का जवाब मांगा है। कोर्ट के एक्शन में आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने इसे लेकर कोई कदम अभी तक नहीं उठाया है।
मौसम के बदलते मिजाज से बुखार, डायरिया, निमोनिया आदि संक्रामक रोगों का कहर लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है। अब बरसात के साथ ही डेंगू और दिमागी बुखार भी मुसीबत का सबब बनेगा। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इसके प्रति लापरवाह नजर आ रहा है। बहराइच जिला अस्पताल के अलावा 15 सीएचसी व 47 पीएचसी संचालित हैं। लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने पर यहां रोगियों को बेड और ड्रिप स्टैंड तक मुहैया नहीं हो पा रही है। हालत यह है कि सीएचसी व पीएचसी पर पहुंचते ही मरीज को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में 201 बेड हैं। जबकि बाल रोग विभाग में 77 बेड की व्यवस्था है। लेकिन मौसम बदलाव के बीच रोगी बढ़ते हैं, ऐसे में करीब औसतन 400 मरीज प्रतिदिन भर्ती होते हैं। इसके चलते रोगियों को इलाज के लिए जरूरी संसाधन भी नसीब नहीं हो पाते। आधी से अधिक दवाएं बाहर से मंगाई जाती हैं। डॉक्टरों के 194 पद स्वीकृत हैं। लेकिन वर्तमान में सिर्फ 100 पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं जिला अस्पताल डॉ आरबी सिंह के रिटायरमेंट के बाद फिजीशियन की कुर्सी खाली चल रही है।
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बीते वर्ष 300 रोगी मिले थे डेंगू पॉजिटिव
डेंगू ने बीते वर्ष जमकर कहर बरपाया था। 1164 बुखार रोगियों की जांच जिला अस्पताल में हुई थी। इनमें 300 रोगी डेंगू पॉजिटिव पाए गए थे। इनमें से सिर्फ 48 रोगी जिला अस्पताल में भर्ती हुए थे। अन्य ने लखनऊ के अस्पतालों की राह पकड़ ली थी। भर्ती होने वालों में भी पांच रोगियों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था।
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बनेगा अतिरिक्त वार्ड
सीएमओ ने कहा कि डेंगू और दिमागी बुखार से निपटने के लिए जिला अस्पताल के साथ ही सभी सीएचसी पर 10 अतिरिक्त बेड का वार्ड स्थापित होगा। इसके लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं। अभी तक इस सत्र में कोई भी डेंगू, दिमागी बुखार और चिकनगुनिया का रोगी नहीं आया है। पर्याप्त दवाएं हैं, दवा की कमी न हो, इसके लिए इंडेट भेजा गया है।
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संक्रामक रोगों से बचाव के उपाय
- डायरिया होने पर तुरंत ओआरएस का घोल पिलाएं
- अस्पताल में चेकअप कराएं
-खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धुलें
-ताजा भोजन करें
-पीने के रखे पानी में क्लोरीन डालें
- तेज धूप में न निकले
- शीतल पेय पदार्थ लें।
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शासन से मांगे गए हैं डॉक्टर
मौसम के बदलते मिजाज से संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना बढ़ गई है। इस बाबत संक्रामक रोग विभाग को अलर्ट किया गया है। डॉक्टरों की कमी है। इस बाबत शासन को पत्र भेजा गया है। यदि कोई डॉक्टर से बाहर से जांच व दवाएं लिखता है तो मरीज शिकायत करे, दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अरुणलाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी