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Bahraich News: नियमों के फेर में 18 परिवार 15 लाख से वंचित

Thu, 26 Mar 2026 12:38 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
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बहराइच। योगी आदित्यनाथ के हाथों भरथापुर के विस्थापन की शुरुआत जहां 136 परिवारों के लिए नई जिंदगी की उम्मीद लेकर आई, वहीं इसी खुशी के बीच 18 परिवार ऐसे भी हैं, जिनकी आंखों में राहत से ज्यादा सवाल और पीड़ा नजर आ रही है।
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सेमरहना में बसाई जा रही भरतपुर कॉलोनी में आवास, सड़क, बिजली, पेयजल, पार्क, हाट-बाजार और रोजगार जैसी तमाम सुविधाएं मिलने से ज्यादातर परिवार उत्साहित हैं। वर्षों तक जंगल और वन्यजीवों के साये में जीवन बिताने वाले लोगों के लिए यह पुनर्वास किसी सपने के साकार होने जैसा है।


...लेकिन इसी योजना में 18 परिवार ऐसे हैं, जिन्हें वन विभाग की ओर से मिलने वाली 15-15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई है। भरथापुर निवासी नेहा और राजकुमारी कहती हैं कि रहने की व्यवस्था तो मिल गई, लेकिन 15 लाख की मदद नहीं मिल रही, यही सबसे बड़ी चिंता है।
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वन और राजस्व नियमों में अंतर से बनी विसंगति
इस विसंगति की जड़ अलग-अलग विभागों के नियमों में छिपी है। वन विभाग ने अपने मानकों के अनुसार 118 परिवारों को ही पात्र मानते हुए आर्थिक सहायता दी, जबकि राजस्व और विकास विभाग ने 136 परिवारों को मान्यता देकर उन्हें जमीन, मकान और अन्य योजनाओं का लाभ दिया।



यह है वन और राजस्व के नियमों की परिभाषा
सबसे बड़ा अंतर परिवार की परिभाषा को लेकर है। वन विभाग में हर वयस्क पुरुष को अलग परिवार माना गया, जबकि राजस्व विभाग में एक ही परिवार में पत्नी और बच्चों को शामिल किया गया है। इसी अंतर ने 18 परिवारों को उस आर्थिक सहारे से वंचित कर दिया, जो उनके लिए नई जिंदगी की मजबूत नींव बन सकता था।


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अब उठ रहे ये सवाल
एक ही गांव, एक ही विस्थापन और एक जैसी परिस्थिति के बावजूद दो अलग-अलग मानक क्यों। क्या ये 18 परिवार बाकी से अलग हैं, या फिर यह सिर्फ कागजी नियमों की खामी है। भरथापुर का पुनर्वास जहां एक बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया है, वहीं यह असमानता यह भी दिखा रही है कि विकास की रफ्तार में कुछ लोग अब भी पीछे छूट रहे हैं। अब इन परिवारों की निगाहें सरकार पर टिकी हैं, क्या उन्हें भी उनका हक मिलेगा या उनका दर्द अनसुना रह जाएगा।
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