बहराइच। तराई भीषण गर्मी की चपेट में है। तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा है। इस गर्मी का असर वन्यजीवों पर भी पड़ रहा है। जिसके चलते तेंदुओं के कदम आबादी की ओर बढ़ने लगे हैं। दो दिन में रिहायशी इलाकों में तेंदुओं की आहट बढ़ी है। वन्यजीव विशेषज्ञ भी मानते हैं कि भीषण गर्मी में बाघ और तेंदुए जंगल के किनारे वाले इलाके में पहुंच जाते हैं। पानी और भोजन की तलाश में वह हमलावर हो सकते हैं।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र 551 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। जंगल में जल स्रोत भी सूखने की कगार पर हैं। जिसके चलते भोजन और पानी की तलाश में वन्यजीवों के कदम आबादी की ओर बढ़ रहे हैं। इसी का नतीजा है कि निशानगाड़ा और मोतीपुर रेंज में दो दिन में तेंदुओं ने दस्तक देकर दो मवेशियों को निवाला बनाया है। क्षेत्र में जंगली जानवर कई लोगों पर हमला भी कर चुके हैं।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि गर्मी में तापमान बढ़ने के चलते वन्यजीव अप्रैल के दूसरे सप्ताह से जुलाई के मध्य आबादी की ओर अधिक रुख करते हैं। यही स्थिति हमलों की बनती है। ऐसे में जंगल के आसपास निवास करने वाले लोग सावधानी बरत कर ही वन्यजीवों के हमले से बच सकते हैं। डीएफओ जीपी सिंह का कहना है कि मौसम बदलाव के समय जंगल के किनारे बसे लोगों को विशेष सजग रहने की जरूरत होती है।
बरतें यह एहतियात
रात में घर का दरवाजा बंद कर सोएं।
अकेले घर से न निकलें।
शौच या खलिहान समूह में जाएं।
घर में पटाखा अवश्य रखें, तेंदुए/बाघ के दिखने पर दगाएं।
जानवर के अहाते में तेंदुए/बाघ की आहट मिलने पर बाहर न जाएं।
बच्चों को घर से अकेले न निकलने दें।
गांवों में चल रहा जागरूकता अभियान
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह का कहना है कि जंगल से सटे गांवों के निकट तेंदुए की चहलकदमी बढ़ी है। इसके साथ ही यहां पर मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बीते दिनों में हुई हैं। ऐसे में क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।