बहराइच। बेहला-बेहरौली तटबंध और उसके उस पार बसे गांवों को बचाने के लिए बाढ़ खंड की ओर से तीन स्पर निर्माण की परियोजना शासन को भेजी गई है। शासन ने परियोजना को हरी झंडी दे दी है।
अगले सप्ताह तक बजट जारी हो जाएगा। स्परों के बनने से तटबंध के साथ ही 13 गांवों की आबादी सुरक्षित हो सकेगी। इस पर लगभग 21 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
स्पर निर्माण से घाघरा नदी की धारा मुड़ेगी साथ ही कटान से भी काफी हद तक निजात मिल जाएगी। घाघरा नदी प्रति वर्ष कटान करते हुए बड़े पैमाने पर तबाही मचाती है। इसमें गांव के गांव खत्म हो जाते हैं।
ग्रामीण पलायन करने को मजबूर होते हैं। गांव का अस्तित्व खत्म होने के साथ ही नदी निरंतर बेलहा-बेहरौली तटबंध की ओर बढ़ रही है। इस समय तटबंध और नदी में महज 200 मीटर का फासला बचा है।
इस समस्या को देखते हुए बाढ़ खंड की ओर से 21.11 करोड़ की कटान निरोधक परियोजना तैयार की गई थी। इस परियोजना के तहत तीन स्परों का निर्माण कर घाघरा नदी की धारा को मोड़ा जाना है।
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शोभित कुशवाहा ने बताया कि परियोजना को शासन से हरी झंडी मिल गई है। फाइल बजट के लिए केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण बोर्ड पटना भेजी गई है। वहां भी एक सप्ताह में बजट की स्वीकृति होने की उम्मीद है।
बजट मिलते ही टेंडर जारी कर कटान निरोधक कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इससे आने वाले समय में घाघरा की लहरों से तटबंध सुरक्षित हो सकेगा। आसपास स्थित 13 गांवों की लगभग 26 हजार की आबादी भी सुरक्षित हो सकेगी। उन्होंने कहा कि बजट मिलते ही नवंबर में शुरू करवा दिया जाएगा।
यहां होगा स्पर का निर्माण
नदी और तटबंध के बीच गोलागंज, कायमपुर और पिपरी गांव के निकट फासला काफी कम बचा है। इससे गांव व तटबंध को खतरा है। आसपास के गांव भी असुरक्षित हैं। यहीं पर स्पर का निर्माण कराया जाएगा।
-शोभित कुशवाहा, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
यह है स्पर
तटबंध से नदी के मुहाने पर मिट्टी और बोल्डर द्वारा बांध तैयार किया जाता है। इस बांध के मुहाने पर डाले गए बोल्डरों से नदी की लहरें टकराकर दूसरी ओर मुड़ जाती हैं, जिससे सीधी दिशा में कटान नहीं होती।
ये गांव होंगे सुरक्षित
स्पर बनने से गोलागंज, कायमपुर, पिपरी, जरमापुर, चौहाननपुरवा, कोठार, लठौरनपुरवा, सांवलपुरवा, जरमापुर आदि गांव नदी की कटान से सुरक्षित होंगे।
60 के दशक में हुआ था तटबंध का निर्माण
जिले को घाघरा की लहरों से बचाने के लिए 60 के दशक में तटबंध का निर्माण किया गया था। बुजुर्ग बताते हैं कि इससे पहले तटबंध न होने से उस समय अचानक बाढ़ आ गई थी और जिला मुख्यालय तक पानी भर गया था।