बहराइच/खैरीघाट। जिले में घाघरा और सरयू कहर बरपा रही हैं। बुधवार को घाघरा खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई। पानी बढ़ने से जरवल ब्लॉक में और आठ गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
सरयू के उफनाने से नानपारा तहसील के शिवपुर विकासखंड में पानी भरने से अफरातफरी मची है। सरयू की कटान से शिवपुर के बेलामकन पांडेय पुरवा गांव के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
बाढ़ में फंसे लोग जैसे-तैसे नाव के सहारे पलायन कर रहे हैं। जिले में बाढ़ से तबाही का दौर बढ़ता ही जा रहा है। घाघरा के साथ सरयू नदी का भी कहर जारी है। महसी, कैसरगंज और नानपारा तहसील बाढ़ की चपेट में हैं।
एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघरा घाट के मुताबिक मंगलवार रात में नदी का जलस्तर 11 बजे 106.776 मीटर पर पहुंच गया था। इसके कारण जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है।
कैसरगंज तहसील के जरवल ब्लॉक अंतर्गत अहाता और नियामतपुर ग्राम पंचायत के आठ गांवों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है।
हालात बदतर हैं। तहसील महसी, कैसरगंज और मोतीपुर के 121 गांव पहले ही बाढ़ की चपेट में हैं। ऐसे में अब जिले में बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या 129 हो गई है। बाढ़ के पानी के साथ ही घाघरा की लहरें भी कहर बरपा रही हैं।
महसी तहसील के नदी उस पार बसे गोलागंज नईबस्ती गांव का अस्तित्व दांव पर लग गया है। पिपरिया, नईबस्ती चौहाननपुरवा गांव नदी के निशाने पर आ गए हैं।
इन गांवों से ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कवायद शुरू कर दी गई है। सरयू नदी भी शिवपुर क्षेत्र में उफान पर आ गई है। अफरातफरी की स्थिति है। लोगों की फसलें पानी में डूब गई हैं। बेलामकन पांडेपुरवा गांव में नदी तेज कटान कर रही है।
100 से अधिक नावों से दी जा रही मदद
सभी बाढ़ प्रभावित इलाकों मेें 100 से अधिक नावों का संचालन किया जा रहा है। अधिकतर ग्रामीणें को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।
उस पार के ग्रामीणों को भी नाव द्वारा निरंतर सहायता पहुंचायी जा रही है। राजस्व टीमें लगी हुई है। सभी 48 बाढ़ चौकियां संचालित हो रही है। राहत बचाव कार्य में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। राजस्वकर्मी क्षेत्रों में कैंप कर रहे हैं।
-रामसुरेश वर्मा, अपर जिलाधिकारी
बर्बाद हो गए मेंथा किसान
शिवपुर में मेंथा किसान बाढ़ से बर्बाद हो गए हैं। मेंथा व्यवसायी नयन जायसवाल, आलोक, मुकेश, मायाराम, रामकुमार, सुरेश, हरीश व विजय कुमार की मेंथा की फसल डूब गई है।
सैकड़ों किसान अचानक आई विपदा से परेशान हैं। वहीं, नानपारा के शिवपुर क्षेत्र में वर्ष 2014-15 में बाढ़ ने दस्तक दी थी। उसके बाद क्षेत्र में बाढ़ का स्वरूप मंद था। लोग काफी राहत महसूस कर रहे थे। अचानक पुन: बाढ़ और अब हो रही कटान से गृहस्थी चौपट हो गई है।
सड़क तो कोई तटबंध पर कर रहा गुजरा
बाढ़ से तीनों तहसील क्षेत्र के ग्रामीणों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। कोई तटबंध तो कोई सड़क के किनारे झोपड़ी और टेंट लगाकर गुजर बसर कर रहा है।
लगभग डेढ़ लाख की आबादी प्रभावित है। मवेशियों को भी कहीं बैठने की जगह नहीं मिल रही है। किसानों ने उन्हें सड़क पर बांध दिया है।