बहराइच। एनएचएम ने प्रदेश के जिलों के साथ बहराइच जिला अस्पताल की रेटिंग जारी की है। विभाग की ओर से जारी रेटिंग में जिला अस्पताल को 66वां स्थान मिला है।
इसका मुख्य कारण प्रसव, इलाज व अन्य सुविधाओं का सुचारु रूप से संचालन न होना बताया गया है। स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यशैली के कारण जिले को निचले पायदान पर रखा गया है।
बहराइच जिला अस्पताल में 201 बेड है। अस्पताल में इलाज के लिए बहराइच के अलावा, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती और नेपाल से मरीज आते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल में सभी सुविधाएं मुहैया कराने का दावा किया जाता है। लेकिन जिला अस्पताल, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर रूप से संचालित नहीं हैं।
यूपी एनएचएम की ओर से पिछले हफ्ते प्रदेश के 75 जिलों की रिपोर्ट जारी की गई है। इसमें जिले को 66वां स्थान मिला है। रिपोर्ट में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लचर बताया गया है।
इनमें जननी सुरक्षा योजना का लाभ, प्रसव से पूर्व होने वाली जांच, जननी सुरक्षा में भुगतान, जच्चा-बच्चा मौत व सीएचसी और पीएचसी पर आने वाले मरीजों को मिल रही सुविधाओं में पिछड़ा होना कारण रहा है। इससे स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी जा रही सुविधाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट नहीं देखी है। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
-डॉ. अरुण कुमार पांडेय, सीएमओ
जागरूकता से ही होंगे बेहतर
एनएचएम की रिपोर्ट में जिला अस्पताल को प्रसव से पूर्व चार जांच में 30.4 प्रतिशत की रेटिंग मिली है। इसका मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं हैं।
जागरूकता के अभाव में महिलाएं स्वास्थ्य केंद्र नहीं आती। जांच के बाद टीके नहीं लगा पाते। ऐसे में जागरूकता से ही स्वास्थ्य सेवाएं आगे बढ़ेंगी।
-डॉ. आरबी यादव, डीपीएम, एनएचएम
नवजातों की मौत के मामले में सुधार
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अप्रैल, मई और जून की स्वास्थ्य रैकिंग जारी की गई है। इनमें प्रति एक हजार पर 18 बच्चों की मौत हुई है। इससे इस क्षेत्र में विभाग ने काफी हद तक अंकुश लगाया है।
जिले में 14 सामुदायिक, 23 पीएचसी, जिला अस्पताल, महिला व पुरुष के अलावा घर पर भी 30.7 प्रतिशत सुरक्षित प्रसव हुआ है। इसकी रिपोर्टिंग क्षेत्रीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा की गई। लेकिन इसमें भी सुधार की गुंजाइश है।