फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

16 गांव बाढ़ से घिरे, एक की मौत

Tue, 11 Jul 2017 09:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
तराई व नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बरसात सेे घाघरा नदी फिर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गई है। जलस्तर दो सेंमी प्रति घंटे के रफ्तार से बढ़ रहा है। महसी तहसील क्षेत्र के 16 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। यहां अफरातफरी की स्थिति है।
विज्ञापन


एक बुजुर्ग की डूबने से मौत हो गई। गोलागंज का देवी मंदिर नदी की तेज कटान से घाघरा में समाहित हो गया। ग्रामीण परेशान हैं। अब तक बाढ़ व कटान से बचाव के उपाय नहीं हुए हैं। लोगों के घरों में पानी घुस गया है।

लगातार बारिश से घाघरा नदी उफान पर है। मंगलवार शाम को नदी का जलस्तर दो सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ता हुआ खतरे का निशान पार कर गया। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि शाम चार बजे नदी का जलस्तर 106.186 मीटर रिकॉर्ड हुआ।
विज्ञापन


यह खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर अधिक है। जलस्तर तेजी से बढ़ने और खतरे का निशान पार होने से नदी महसी क्षेत्र में उफान पर आ गई है। नदी उफनाने से गोलागंज, प्रधानपुरवा, नगेसरपुरवा, जमापुर, कायमपुर, भागवतपुरवा, जोगापुरवा, चुरईपुरवा, रामसहायपुरवा, मंगलपुरवा, तुरंतीपुरवा समेत 16 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।

कायमपुर-जरमापुर मार्ग पर ढाई से तीन फीट पानी बह रहा है। चमरहियापुरवा और फक्कड़पुरवा गांव में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। अब तक राहत व बचाव के उपाय नहीं हुए हैं। कटान और बाढ़ के बीच गोलागंज में स्थित समय माता देवी मंदिर सोमवार देर रात घाघरा की लहरों में समाहित हो गया। जहां पर मंदिर था, वहां अब घाघरा बह रही है।

वहीं, बौंडी थाना अंतर्गत गोलागंज निवासी रामलखन (60) सोमवार देर रात नित्यक्रिया के लिए घर से निकला। इसी समय बाढ़ आ गई। बाढ़ के बहाव में वह अपने को संभाल नहीं सका और बहते हुए भकोसा नाले में गिर गया। इससे डूबकर उसकी मौत हो गई। सुबह उसका उतराता हुआ शव मिला।


ग्रामीणों को संभलने तक का नहीं मिला मौका
रात में बाढ़ की दस्तक तब हुई, जब लोग घरों में सो रहे थे। इससे लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। जब लोग जगे, तब तक बाढ़ का पानी घरों में घुस चुका था। सुबह नाव से ग्रामीणों ने गृहस्थी को सुरक्षित करने की जुगत शुरू की।

कोरियनपुरवा निवासी कमला प्रसाद और जगदीश समेत अन्य ग्रामीणों ने निजी नाव के सहारे गृहस्थी को जैसे-तैसे बाढ़ क्षेत्र से बाहर बेलहा-बेहरौली तटबंध पर पहुुंचाया। जरमापुर गांव में भी बाढ़ का पानी घुसने के बाद गांव निवासी बालकराम, पतल्ली, पुल्ली, संगमलाल, विमल कुमार अपना सामान निकालकर तटबंध पर पहुंचे।

बाढ़ राहत चौकियों पर लगा ताला
जिला प्रशासन बाढ़ से निपटने के लिए जिले में 48 बाढ़ राहत चौकियों के संचालन का दावा कर रहा है। लेकिन महसी में बाढ़ की दस्तक के बावजूद अब तक बाढ़ राहत चौकियों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। शारदापुरवा बाढ़ चौकी पर ताला लटकता मिला। किसानगंज, गोलागंज की बाढ़ चौकी पर भी ताला लगा होने के साथ गोबर व गंदगी पसरी मिली।

प्रशासन से नहीं मिल रही मदद
कायमपुर निवासी मगन, मुन्नू, सोहनलाल, मायाराम, बनवारी आदि ने बताया कि बाढ़ के बाद सभी घर, गृहस्थी को लेकर चिंतित हैं। सूचना तहसील को दी गई है। लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिल सकी है। जितना हो पा रहा है, अपने हिसाब से परिवार को सहेजकर की कोशिश कर रहे हैं।

एसडीएम बोले- अभी चिंता की नहीं बात
महसी क्षेत्र में बाढ़ की दस्तक के मामले में उप जिलाधिकारी नागेंद्र कुमार से बात की गई तो बोले मंगलवार है, मीटिंग में हूं। लोगों की समस्याएं सुन रहा हूं। कुछ पानी बढ़ा है। नायब तहसीलदार को मुआयना करने भेजा है। अभी चिंता की कोई बात नहीं है। एसडीएम के इस बयान के इतर गांवों में हाहाकार की स्थिति है। लोग अपनी जिंदगी और गृहस्थी सहेजने को लेकर परेशान हैं।

घाघरा में छोड़ा 2.57 लाख क्यूसेक पानी
चौधरी चरण सिंह गिरजापुरी बैराज के सहायक अभियंता एसआर वर्मा ने बताया कि मंगलवार को घाघरा नदी में गिरिजापुरी बैराज से 115127 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। बनबसा बैराज से 117165 व शारदा बैराज से 25252 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। ऐसे में बुधवार सुबह तक जलस्तर में और इजाफा होने की आशंका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें