उर्रा (बहराइच)। उर्रा बाजार में स्थित कांजी हाउस में 50 मवेशी बांधे गए थे, लेकिन कांजी हाउस में न तो चारे की और न ही पानी की व्यवस्था की गई थी। पानी व चारे के अभाव में मवेशी जिंदगी-मौत से जूझ रहे थे। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने बीडीओ व अपर मुख्य पंचायत अधिकारी से की। अपर मुख्य पंचायत अधिकारी ने मौके का मुआयना कर चारा-पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, लेकिन कांजी हाउस से मवेशियों को बाहर निकाल दिया गया। अब यह मवेशी गांव में घूम कर ग्रामीणों पर हमलावर हो रहे हैं।
मिहींपुरवा विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उर्रा बाजार में कांजी हाउस का निर्माण कराया गया है। इसका ठेका प्रतिवर्ष होता है। इस कांजी हाउस में क्षेत्र के 50 मवेशी बंधे हुए थे। गांव निवासी योगेंद्र बहादुर श्रीवास्तव, शैलेंद्र साहनी, संदीप मौर्या, अलीशेर खान, घनश्याम, सुनील मौर्य, नासिर खान, रवि अग्रवाल आदि ने बताया कि कांजी हाउस में मवेशी बंधे थे, लेकिन मवेशियों को पानी व चारा की नहीं दिया जा रहा है। जिससे कई मवेशी मृत होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। लेकिन न तो ग्राम प्रधान ध्यान दे रहे हैं और न ही ग्राम विकास अधिकारी। जिससे स्थिति और बदतर होती जा रही है।
सभी ने बीडीओ को सूचना दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर ग्रामीणों ने अपर मुख्य पंचायत अधिकारी प्रदीप गुप्ता से शिकायत की। मंगलवार को अपर मुख्य पंचायत अधिकारी ने गांव का मुआयना कर मवेशियों का हाल देखा और चारा व पानी की व्यवस्था करने के निर्देश कांजी हाउस के संचालकों को दिए। लेकिन बुधवार की रात किसी ने कांजी हाउस से मवेशियों को बाहर कर दिया।
यह मवेशी गांवों में इधर-उधर घूम रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कांजी हाउस से मवेशियों को बाहर कर दिया गया है। उन्होंने कांजी हाउस संचालकों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए शिकायत की है। इस मामले में अपर मुख्य पंचायत अधिकारी से प्रदीप गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कांजी हाउस से मवेशी बाहर कैसे गए, इसकी जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।