फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तृगलक शासन काल के स्थापत्य कला का नमूना है कदम रसूल

विज्ञापन
विज्ञापन
बहराइच। सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह में 757 वर्ष पूर्व बना कदम रसूल भवन तुगलक शासनकाल की स्थापत्य कला का नायाब नमूना है। दरगाह आने वाले जायरीन कदम रसूल भवन में महफूज हजरत मोहम्मद के पद चिह्नों को चूमकर आगे बढ़ते हैं। भवन में पैगंबर हजरत मोहम्मद के हाथ व पैरों के निशान शिला पर सुरक्षित हैं। मान्यता है कि इस शिला को फिरोज शाह तुगलक ने अरब से मंगवाकर स्थापित कराया था।
विज्ञापन


सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह अमन-चैन, भाईचारे व एकता की प्रतीक है। दरगाह में गाजी का किला स्थापत्य कला का बेहतरीन नमूना है। मुख्य किले से सौ मीटर की दूरी पर कदम रसूल का भवन है। जानकार बताते हैं कि 757 वर्ष पूर्व फिरोज शाह तुगलक बहराइच आए थे। उनके प्रधानमंत्री हसन मेहंदी के लिए इस भवन का निर्माण कराया गया था।

दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष सैयद शमशाद बताते हैं कि कदम रसूल भवन के निर्माण में लगभग दस वर्ष का समय लगा था। बाद में इसी भवन में फिरोज शाह तुगलक ने हजरत मोहम्मद के पदचिह्न और हाथ के पंजे अंकित शिला अरब से मंगवाकर स्थापित करवाए। मान्यता है कि कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब जब पहाड़ों पर चलते थे तो उनके पैरों के निशान शिला पर अंकित हो जाते थे।
विज्ञापन


हाथ रखने पर पत्थर पर हथेली का निशान बन जाता था। इसी तरह की एक शिला अरब से मंगवाकर कदम रसूल भवन में रखी गई है। इस शिला के दर्शन के लिए दरगाह शरीफ में रोज सैकड़ों लोग पहुंचते हैं। हर वर्ष जेठ माह में लगने वाले वार्षिक मेले में आने वाले जायरीन इन पदचिह्नों व हथेली को चूमकर आगे बढ़ते हैं। भवन में ईरानी स्थापत्य कला की झलक भी देखने को मिलती है।

डबल लॉकर में सुरक्षित है खान-ए-काबा की लकड़ी
खान-ए-काबा (अल्लाह का घर) इस्लाम के मुताबिक अरब में है। मान्यता है कि फिरोज शाह तुगलक ने जब रसूल के पदचिह्न वाली शिला मंगवाई। उसी समय खान-ए-काबा पर लगे काले गिलाफ का एक टुकड़ा और दरवाजे की लकड़ी का एक अंश भी आया था। यह दोनों चीजें दरगाह प्रबंध समिति के डबल लॉकर में सुरक्षित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें