बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र को हरा भरा रखने व पर्यटकों को बोटिंग की सुविधा मुहैया कराने वाली नेपाल की गेरुआ नदी रेत में तब्दील हो गई है।
अब कतर्निया के भ्रमण को आने वाले पर्यटक बोटिंग का लुत्फ नहीं उठा सकेंगे। नदी के दुर्लभ जलीय जीवों के जीवन पर भी संकट खड़ा हो गया है। घड़ियालों के प्रजनन का समय चल रहा है। ऐसे में प्रजनन काल भी असुरक्षित हो गया है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के बीच से होकर नेपाल की गेरुआ नदी बहती है। यह नदी नेपाल के दानव ताल नामक स्थान पर पहाड़ से निकलती है।
नेपाल के चीसा पानी से कैलाली होते हुए नदी इंडो-नेपाल सीमा पर कोठियाघाट के निकट भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करती है। कोठियाघाट से चौधरी चरण सिंह गिरिजा बैराज तक नदी की दूरी लगभग 16 किलोमीटर है।
इसी के मध्य कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र का घना जंगल है। 21 अप्रैल से चौधरी चरण सिंह गिरिजा बैराज के सभी फाटक को खोल दिए गए है, जिसके कारण नदी का पानी पूरी तरह सूख गया है।
कलरव करने वाली नेपाल की गेरुआ नदी रेत मानिंद नजर आ रही है। लोग पैदल नदी पार कर रहे हैं। नदी के सूखने से जलीय जीव गैंगेटिक डाल्फिन, मगरमच्छ, घड़ियाल की जिंदगी भी खतरे में नजर आ रही है।
गर्मी में कतर्नियाघाट की सैर पर आने वाले पर्यटकों को भी नदी के सूखने से बोटिंग का मजा नहीं मिल पा रहा है। सबसे बड़ी दिक्कत गेरुआ नदी में घड़ियालों के प्रजनन की है।
इस समय घड़ियालों का प्रजनन काल चल रहा है। ऐसे में पानी के अभाव में घड़ियाल नदी के निचले हिस्से में चले गए है।
मादा घड़ियाल नदी के टापू पर अंडे कैसे सहेजेंगे, इस पर सवाल उठ रहे हैं। हालात ये है कि नदी में लोग इस समय पैदल आ-जा रहे हैं।
जलीय जीवों को नहीं होता नुकसान
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन का कहना है कि नदी में पानी सूखने पर जलीय जीव नेपाल की सीमा पर नदी में उन स्थानों पर चले जाते हैं। जहां पर पानी का ठहराव होता है। वर्षा के समय पुन: जलीय जीव अपने स्थानों पर पहुंच जाते हैं।
जाल की मदद से सहेज रहे घोंसले
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के डीएफओ जीपी सिंह का कहना है कि क्लोजर सामान्य प्रक्रिया है। इस अवधि में जलीय जीव नदी के अप स्ट्रीम में सुरक्षित रहते हैं।
उन्हें कोई नुकसान नहीं होता है। शीघ्र ही पुन: नदी में पानी आ जाएगा, नदी के टापू पर बने घोंसलों को जाल की मदद से सहेजा जा रहा है। ऐसे में प्रजननकाल प्रभावित नहीं होगा।
15 तक सूखी रहेगी नदी
चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज के सहायक अभियंता एसआर वर्मा ने बताया कि नदी का क्लोजर 15 मई तक रहेगा। इसके बाद बैराज के फाटक बंद होने पर ही पानी आ जाएगा।
यह है क्लोजर
बैराज की साफ-सफाई के लिए गिरिजापुरी बैराज के सभी तावे खोल दिए जाते हैं। इसके कारण गेरुआ और कौड़ियाला नदियों का पानी पूरी तरह घाघरा में चला जाता है।
नदी सूख जाती है और बैराज के कल, पुरजे और दीवारों की मरम्मत में आसानी होती है। पुन: बैराज के फाटक बंद होने पर धीरे-धीरे पानी इकट्ठा होता है। ऐसे में नदी सामान्य रूप में आ जाती है।