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...न हिंदू न मुस्लिम हूं मुझे इंसान लिख देना

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...न हिंदू न मुस्लिम हूं मुझे इंसान लिख देना
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भवन सभागार में काव्य गोष्ठी का आयोजन
बहराइच। अखिल भारतीय हिंदी साहित्य परिषद एवं भारतीय अवधी समाज संस्था शाखा बहराइच के संयुक्त तत्वावधान में नियमित पाक्षिक काव्य गोष्ठी का आयोजन बीती देर शाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भवन सभागार में हुआ, जिसकी अध्यक्षता कवि शिवकुमार सिंह रैकवार ने की। कार्यक्रम मेें कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सभागार में आयोजित काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि कवि अयोध्या प्रसाद शर्मा नवीन रहे। शुभारंभ कवि रामसूरत वर्मा जलज के द्वारा मां शारदे के वंदन से हुआ। इसके बाद उन्होंने पढ़ा - सम्मानों को भूलते व्यक्ति के सहज स्वभाव, पर जन्मों तक सालते अपमानों के घाव। कवि तिलकराम अजनबी ने पढ़ा - जो बाये अंजीर खुबानी उसपे हरदम रहे जवानी, बेर बेल लीची जो खाए उसको अच्छी नींद सताए। कवि विकास चौधरी ने पढ़ा - भ्रष्ट आचरण न हो कायम ईमान हो, अभिमानी शिवा जी से वीर मांगती है मां। कवि अयोध्या सिंह योगी ने पढ़ा - मेरी भक्ति का प्रभु मेरा तो कुछ यूं मान लिख देना, न हिंदू न मुस्लिम हूं मुझे इंसान लिख देना। कवि राघवेंद्र त्रिपाठी ने पढ़ा - समय परे पहचानिए मनई आपन खास, शुभ दिन में तो सब सुजन सभी हृदय के पास। कवि डॉ. अशोक पांडेय गुलशन ने पढ़ा - बुझ गया चूल्हा न जाने किस जगह थाली पड़ी है, एक कोने में दुबककर आज घरवाली पड़ी है। कवि माहिर अली माहिर ने पढ़ा - ईद का चारो तरफ गुलजार है, सज रहे घर मुहल्ले सज रहे बाजार है। कवि अयोध्या प्रसाद नवीन ने पढ़ा - स्वाभिमान को बचाया है महाराणा प्रताप ने, भारत को वीरता का मार्ग दिखाया है महाराणा प्रताप ने। कवि शिवकुमार सिंह रैकवार ने पढ़ा - मानव तन अरु बांसुरी, शिव नहीं किंचित भेद, वंशी में दस छेद हैं मानुष तन दस छेद। कार्यक्रम का संचालन कवि राघवेंद्र त्रिपाठी ने किया।
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