बहराइच। पावर कॉर्पोरेशन में तैनात कुशल व अकुशल श्रमिकों के वेतन से हुई ईपीएफ कटौती के 11 करोड़ रुपये कहां गए, विभागीय अधिकारी नहीं बता पा रहे हैं है। 575 कर्मचारी प्रभावित हैं। इन सभी के वेतन से वर्ष 2009 से कटौती हो रही है। इस मामले में दो कंपनियों पर एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। लेकिन इसके बाद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कंपनियां बदलती रही। कटौती होती रही। ईपीएफ की नकदी कहां गई, पता नहीं चल रहा है। 11 करोड़ का घालमेल है। इस मामले में कर्मचारियों का दबाव पड़ने के बाद अब एक्सईएन ने विभागीय जांच शुरू करवाई है। तब हड़कंप मचा है।
बिजली विभाग को निगम में तब्दील करने के बाद से यहां पर तैनात होने वाले कुशल व अकुशल कर्मचारी किसी न किसी एजेंसी से संबद्ध रहते हैं। इस समय बिजली विभाग में 361 अकुशल व 214 कुशल श्रमिक कार्यरत हैं। यह श्रमिक वर्तमान समय में आवाम कांस्ट्रक्शन एंड मेसर्स अनिल कुमार के बैनर तले बिजली विभाग में काम कर रहे हैं। अब तक इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी अलग-अलग वर्षों में अन्य पांच कंपनियां भी उठा चुकी हैं। वर्ष 2009 में विभाग में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए ठेकेदारी प्रथा के माध्यम से संविदा प्रणाली व्यवस्था लागू हुई। तब से व्यवस्था के तहत विभिन्न बिजली उपकेंद्रों पर 575 कुशल व अकुशल संविदाकर्मियों की तैनाती हुई। उनके वेतन से ईपीएफ की कटौती भी शुरू की गई। लेकिन आज तक कटौती की राशि प्राप्त नहीं हुई, न ही उसका लेखा-जोखा कर्मचारियों को उपलब्ध कराया गया। जबकि इसके लिए कई बार आंदोलन भी हुए। 2009-2012 तक अवध ट्रेडिग कंपनी और 2012-13 के बीच विकास ट्रेडर्स कर्मचारी एजेंसी के माध्यम से ये श्रमिक बिजली विभाग में तैनात रहे। लेकिन इन्हें कंपनी द्वारा ईपीएफ का भुगतान नहीं किया गया। इस पर इन दोनों कंपनियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई। दरगाह थाने में मुकदमा दर्ज तो हुआ, लेकिन अब तक कार्रवाई शून्य है। इसके बाद 2013-15 के मध्य मेसर्स अनिल कांस्ट्रक्शन, शिवालिक इंटरनेशलन व पप्पू इलेक्ट्रॉनिक ने संयुक्त रूप से कर्मचारियों के कार्य का ठेका लिया। इन कंपनियों का कार्यकाल खत्म हो गया। लेकिन ईपीएफ का भुगतान नहीं हुआ। 2015 से आवान कांस्ट्रक्शन और मेसर्स अनिल कुमार यादव कर्मचारियों की तैनाती का जिम्मा संभाल रहे हैं। लेकिन वर्तमान कार्यकाल में भी ईपीएफ की राशि कहां है, पता नहीं चल रहा है। जबकि 2009 से अब तक कर्मचारियों के वेतन से 11 करोड़ की कटौती हो चुकी है।
शुरू करवाई है विभागीय जांच
विभाग में एजेंसियों के माध्यम से 575 कुशल और अकुशल श्रमिक तैनात हैं। इनके ईपीएफ की राशि का मामला फंसा हुआ है। कर्मचारियों ने इस मामले में अवगत कराया है। जांच करवा रहे हैं। काफी पुराने समय से मामला उलझा हुआ है। जांच में खुलासा हो सकेगा। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। -टीआर श्रीवास्तव, एक्सईएन विद्युत
दो कंपनियों पर लगा है गबन का आरोप
वर्ष 2009 से 2012 तक अवध ट्रेडिंग कंपनी ने कर्मचारियों का जिम्मा संभाला। जबकि वर्ष 2012 से 2013 के मध्य विकास ट्रेडर्स के बैनर पर कर्मचारियों ने काम किया। इन दोनों कंपनियों पर एक करोड़ से अधिक की कटौती की राशि के गबन का आरोप लग चुका है। लेकिन कार्रवाई अब तक शून्य है।