बहराइच। अदालतों में लंबित मुकदमों को लेकर मुख्य न्यायाधीश की चिंता लाजिमी लग रही है क्योंकि देश के छोटे से जिले बहराइच के ही विभिन्न अदालतों में 30 मार्च तक 1.56 लाख मुकदमे लंबित हैं।
इनमें फौजदारी के मुकदमों की संख्या सबसे ज्यादा है। जिले में 27 कोर्ट हैं तो जरूर लेकिन इनमें से सात कोर्ट में न्यायाधीशों के पद रिक्त हैं। ऐसे में न्यायाधीशों पर बोझ बढ़ता जा रहा है।
बहराइच की आबादी 36 लाख है। इसके सापेक्ष 27 न्यायालय हैं। इनमें एक कोर्ट जिला जज का है, जबकि 10 कोर्ट एडीजे के अधीन हैं। 16 अन्य अदालतें हैं। देखने में तो न्यायालयों की संख्या पर्याप्त लगती है लेकिन निचली अदालताें में मुंसिफ स्तर के लगभग सात न्यायालयों में पद रिक्त चल रहे हैं।
जबकि मुकदमों के आंकड़ों पर नजर डालें तो फौजदारी के लगभग 60099 मामले विभिन्न न्यायालयों पर लंबित हैं। दीवानी के 38 हजार तथा डीजे कोर्ट और उनके अधीन अदालतों में लगभग 55 हजार मामले लंबित चल रहे हैं। इसके साथ ही प्रतिदिन औसतन 30 से 40 नए मुकदमे अलग-अलग अदालतों पर पहुंच रहे हैं।
यहां इतने मुकदमे लंबित
फौजदारी के 60099
दीवानी के 38000
डीजे कोर्ट व उसके अधीन कोर्ट में 55000
जजों की हो भर्तियां, बने स्पेशल बेंच
पुराने मुकदमे तो लंबित हैं ही, रोजाना नए मुकदमे भी कोर्ट में पहुंच रहे हैं। ऐसे में मुकदमों की संख्या निरंतर बढ़ रही है लेकिन जजों की भारी कमी है। ऐसे में रिटायर जज की भर्तियां कर स्पेशल बेंच बनाकर लंबित मुकदमों के निस्तारण की पहल की जा सकती है। इस मामले में सरकार को कदम उठाने की जरूरत है। अगर ऐसा हो तो आगामी पांच से छह साल में मुकदमों का ग्राफ काफी कम हो जाएगा।
- केपी सिंह, रिटायर्ड एडिशनल स्पेशल जज
अभियोजन बरते सक्रियता, रिक्त पद भरें
न्यायालयों में जब जज के पद ही रिक्त हैं तो सुनवाई कैसे होगी। इस मामले में अभियोजन पक्ष को भी सक्रियता बरतनी होगी। गवाहों में लेटलतीफी से बचना होगा। जितनी जल्दी गवाह पेश किए जाएंगे, उतनी जल्दी मामले निस्तारित होंगे। लंबित मुकदमों के लिए स्पेशल बेंच भी बनाई जा सकती है।
- गया प्रसाद मिश्र, पूर्व अध्यक्ष बार एसोसिएशन