नेपाल से छोड़े गए पानी के चलते घाघरा नदी का जलस्तर गुरुवार को एल्गिन ब्रिज पर लाल निशान से 62 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। इससे महसी क्षेत्र के और पांच गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या 119 हो गई। तमाम लोग गांवों में फंसे हुए हैं।
उन्हें निकालने को नावें नहीं दिख रही हैं। लोग जान जोखिम में डालकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। करीब 1.40 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हैं। फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। बाढ़ से जिले में हाहाकार मचा हुआ है। महसी और नानपारा क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित है।
गुरुवार दोपहर बाद एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर 106.696 मीटर मापा गया। खतरे के निशान से नदी 62 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है। इसके चलते महसी क्षेत्र के नदी उस पार बसे अटोडर, भयापुरवा, रूडाकोड़र, चुरईपुरवा समेत पांच गांव में बाढ़ का पानी भर गया है।
ग्रामीणों में हड़कंप मचा है। बेलहा-बेहरौली तटबंध और कायमपुर मार्ग पर ढाई फीट पानी बह रहा है। बाढ़ में फंसे लोगों के निकलने के लिए नावें दिख रही हैं न ही स्टीमर। लोग जान जोखिम में डालकर कतार बनाकर बाढ़ के पानी से निकल रहे हैं।
उधर बुधवार को सरयू और घाघरा के उफान के चलते महसी के 34 तथा शिवपुर क्षेत्र के 80 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। इससे 1.40 लाख की आबादी बाढ़ की चपेट में है।
शिवपुर तहसील में सरयू की बाढ़ के चलते गुजरातीपुरवा, छिंटानपुरवा, मोतीपुरवा, दीनापुरवा, ठेकापुरवा, ददरिया गांव और बलतूरामपुरवा में घरों में पानी भरने से चूल्हे नहीं जल सके हैं। जैसे-तैसे लोग जिंदगी गुजार रहे हैं। दोनों तहसील क्षेत्रों में करीब 38 सौ हेक्टेयर खेती योग्य जमीन बाढ़ की चपेट में आ गई हैं।