बरनावा के श्री चंद्रप्रभु मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।
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- श्रद्धालुओं ने की उत्तम शौच धर्म की पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व माघ माह के उपलक्ष्य में चल रहे दशलक्षण पर्व के चतुर्थ सोपान में मंगलवार को श्रद्धालुओं ने उत्तम शौच धर्म को अंगीकार किया। दस श्रीफल समर्पित कर भगवान चंद्रप्रभु की पूजा अर्चना की।
पंडित प्रदीप पीयूष शास्त्री ने कहा कि बिना नींव के मकान कितना भी सुंदर हो, विशाल हो, स्थाई नहीं बन सकता। उसी प्रकार आत्मा-शुद्धि सार्थक तब ही संभव है, जब हमारे पास शौच धर्म हो। आत्मा का आत्मिक आनंद भोग में नहीं त्याग में है। धन, संपत्ति, मान-सम्मान के पीछे दौड़ने वाला मनुष्य सदा रिक्त ही रहता है। उन्होंने कहा कि ममत्व भाव का त्याग ही शौच के प्रवेश में साधक है। शौच धर्म से मन, वचन और कर्म की शुद्धि होती है, जिससे आत्मा निर्मल एवं महान बनती है। इसलिए लोभ का त्याग कर पवित्र मन को शुद्धि पूर्वक उत्तम शौच धर्म का पालन करना चाहिए। पूजा में राजेंद्र जैन, सरिता जैन, सीता जैन, पायल जैन, लोकेश जैन आदि उपस्थित रहे।