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खेत-खलिहान तक बही बदलाव की बयार

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ट्रेक्टर से खेत पर काम करता किसान - फोटो : BAGHPAT
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अमर उजाला स्थापना दिवस
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- निजी क्षेत्र की मलकपुर मिल की स्थापना
- आधुनिक संयंत्रों से खेती कर रहे किसान
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। कृषि प्रधान जिले ने पिछले 34 साल में बदलाव का दौर देखा। हल और बैल से की जाने वाली खेती ट्रैक्टर से शुरू हो गई। पहले रहट, नहर-रजबहों, सरकारी नलकूपों पर खेतों की सिंचाई पूरी तरह निर्भर रहती थी, लेकिन इसके बाद अपने-अपने खेत में कुएं वाली ट्यूबवेल के चलने से सिंचाई में नई क्रांति हुई। अब सबमर्सिबल पंपों के चलने से खेतों से कुएं गायब होते जा रह हैं। खेती का रकबा बढ़ता चला गया। किसानों की निर्भरता अब पूरी तरह ट्रैक्टर पर हो गई है। नए-नए संयंत्रों से खेती की जा रही है। जुताई-बुआई से लेकर कीटनाशक के छिड़काव तक के लिए अब नई-नई मशीनें उपलब्ध हैं। मिट्टी की जांच, नए-नए बीज किसानों के लिए उपलब्ध हैं।
इस तरह हुई चीनी मिलों की स्थापना
बागपत। जिले में गन्ना किसानों के लिए साल 1960-61 में बागपत शुगर मिल की स्थापना की गई थी। तब मिल की पेराई क्षमता साढ़े 12 हजार क्विंटल गन्ना प्रतिदिन थी। वर्तमान में क्षमता 25 हजार क्विंटल प्रतिदिन है। मिल के दोहरीकरण की मांग चल रही है। सहकारी क्षेत्र की रमाला शुगर मिल की स्थापना 1978-79 में हुई थी। निजी क्षेत्र की मलकपुर चीनी मिल की शुरूआत 1998 में हुई।
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जिले में बढ़ता चला गया गन्ना
बागपत। पिछले छह दशक जिले में गन्ने का रकबा लगातार बढ़ा है। वर्तमान में एक लाख 25 हजार किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं। वर्तमान में जिले में 74195.982 हेक्टेयर में गन्ने की फसल खड़ी है। पिछले साल के सापेक्ष 5.810 हेक्टेयर गन्ने की खेती का रकबा इस बार अधिक है।
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