गर्मी का पारा चढ़ने के साथ गेहूं की फसल पर संकट के बादल मंडारने लगे है। गेहूं की फसल के लिए मौसम अनुकूल नहीं है। चढ़ता पारा गेहूं की फसल को प्रभावित कर रहा है। अगर यही हाल रहा तो गेहूं के उत्पादन पर भी काफी असर पड़ेगा।
फरवरी माह में इस बार मौसम सही था, लेकिन मार्च के आते-आते मौसम फिर से गर्म होने लगा। पिछले कुछ दिन से तो अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जो गेहूं की फसल के लिए अनुकूल नहीं है। इस समय मौसम में तेजी से परिवर्तन का आना सरसों और आलू की फसल के लिए भी सही नहीं है।
राजकीय बीज भंडार पर तैनात एडीओ कृषि रक्षा अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि गेहूं की फसल के लिए तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है, जो सही नहीं है। तेजी से तापमान के बढ़ने के कारण पछेती प्रजाति ज्यादा प्रभावित होती है। जिसका असर उत्पादन पर 20 से 25 प्रतिशत तक दिखाई देता है।
तेज धूप से ये होता है नुकसान
कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के प्रभारी डॉ. संदीप चौधरी के अनुसार अधिक तापमान के चलते गेहूं के पौधों की बढ़वार रुक जाती है और फसल समय से पहले ही पकने लगती है। ऐसे में पकी हुई फसल की बालियां छोटी और कमजोर हो जाती है।
इससे फसल में गुणवत्ता और आकार में भी असर पड़ता है। अधिक तापमान के कारण पौधे का पूरा पकाव नहीं हो पाता है। मौसम में दबाव में बालियां निकल आती है, जो फसल के लिए अच्छा नहीं है। बीते पांच दिन से मौसम में अधिकतम तापमान बढ़ रहा है। इस कारण से पूरी तरह से सर्दी गायब हो चुकी है।
मार्च में ऐसे चढ़ रहा पारा
तिथि अधिकतम न्यूनतम
10 30 17
11 30 15
12 31 16
13 33 16
14 33 17
15 35 19
16 35 21
17 35 22
21 मार्च के बाद मौसम में बदलाव का अनुमान
खेकड़ा। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि वर्तमान में तापमान 34-35 तक पहुंच रहा है। 21 मार्च के बाद मौसम में एक-दो दिन के लिए हल्की घटा होने पर बदलाव होने का अनुमान है।