दशलक्षण पर्व के दिन शनिवार को सत्य धर्म की पूजा की गई। जैन श्रद्धालुओं ने अर्घ्य चढ़ाए। जैन साध्वी कीर्तिमति माता ने कहा सत्य को जीवन में धारण करने वाला मनुष्य धन, वैभव और यश को प्राप्त करता है।
शनिवार को दशलक्षण विधान के अंतर्गत दिगंबर जैन मंदिर में विधानाचार्य पंडित सतीश शास्त्री ने श्री जी का अभिषेक और शांति धारा मंत्रोचार के साथ पूजा अर्चना कराई। दशलक्षण विधान के अंतर्गत सत्य धर्म की पूजा भक्ति संगीत के साथ हुई। प्रवचन करते जैन साध्वी आर्यिका गणिनी कीर्तिमति माता ने कहा सत्य धर्म की जैन धर्म में विशेष महत्वता बताई।
उन्होंने कहा अगर सत्य हमारे जीवन में अवतरित हो जाए तो संसार की कोई भी शक्ति हमें शिवपुर जाने से नहीं रोक सकती। सत्य के बिना सारा संसार श्मशान के समान है। हम दान, परोपकार, सेवा, तपस्या, ब्रहमचार्य के माध्यम से जीवन को स्वर्ग बना सकते हैं, इसलिए सत्य की ओर अपना कदम बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा सत्य हित मित्र और प्रिय होना चाहिए। किसी को कष्ट देने वाला असत्य की श्रेणी में आता है।
दोपहर में तत्वार्थ सूत्र का वचन किया। शाम को श्रावकों ने सामूहिक प्रति कुमार कर अपने पाप कर्म का प्राश्चीत किया। भगवान पार्श्वनाथ की आरती के बाद सतीश शास्त्री ने कहा सत्य का मार्ग सीधा है, इस पर चलना कठिन है। सत्य पर चलने की कला से सहजता व सरलता प्रकट होती है। क्षुल्लिका माता कांति भूषण भी मौजूद रही। प्रहलाद जैन, पवन जैन, सुधीर जैन, राकेश मित्तल, आनंद जैन, प्रवीण जैन, सुनील जैन चक्की वाले, अभिषेक जैन मौजूद रहे।