राम मंदिर आंदोलन :
- ट्रेन और बसों में सवार होकर अयोध्या के लिए रवाना हुए थे कारसेवक
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। दिसंबर, 1992 के पहले सप्ताह में बागपत जनपद से सैकड़ों कारसेवक अयोध्या मंदिर निर्माण के लिए पहुंचे थे। बहुत से कारसेवक अयोध्या मेें राम जन्मभूमि स्थल तक पहुंचने में कामयाब हो गए थे, लेकिन काफी कार सेवकों को रास्तें में ही रोक दिया गया था। अयोध्या रवानगी के दौरान कार सेवकों ने राम लल्ला हम आएंगे, राम मंदिर वहीं बनाएंगे आदि नारे लगाकर कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम किया था।
तब कारसेवकों मेें जबरदस्त जोश व जुनून था, लेकिन आज फैसला आने के बाद उनको सुकून मिला। उनका तर्क है कि इस जीवन में इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाकर भव्य राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया था। इस खुशी को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन पुरानी यादों को ताजा करते हुए विश्व हिंदू परिषद के पूर्व जिलाध्यक्ष व वर्तमान विभाग संरक्षक बिनौली रोड़ निवासी रामकुमार गुप्ता बताते है कि अयोध्या कूच करने से पहले चोरी-छिपे गांव-गांव जनसंपर्क कर लोगों को अयोध्या जाने की सूचना दी गई थी। परिषद के कार्यकर्ताओं सहित आंदोलन से जुडे़ गणमान्य लोग काफी उत्साहित थे। दिसंबर 1992 के पहले सप्ताह में जनपद से सैकड़ों की संख्या परिषद के कार्यकर्ताओं का जत्था पूर्व जिलाध्यक्ष रामकुमार गुप्ता के साथ दिल्ली बस स्टैंड पर एकत्रित हुए और अयोध्या जाने से पूर्व नगर से विशाल जलूस निकाला।
खूब गूंजा नारा... तेल लगा लो डाबर का, नाम मिटा दो बाबर
बड़ौत। बजरंग दल के जिला संयोजक रहे विनोद कुमार जैन एडवोकेट के नेतृत्व में भी नगर में नेहरू मूर्ति पर कार्यकर्ता एकत्रित हुए थे। इस दौरान कार्यकर्ता नारा लगा रहे थे कि ‘राम लल्ला हम आएंगे, राम मंदिर वहीं बनाएंगे’, ‘तेल लगा लो डाबर का, नाम मिटा दो बाबर’ का आदि नारे लगा रहे थे। पुलिस की बढ़ी चौकसी थी। सभी को मेसेज दिया गया था, अयोध्या पहुंचना है हर हाल में। उन्होंने बताया कि उस दौरान बहुत से कारसेवक वहां पर पहुंच गए थे और बहुत से पुलिस ने बीच में रोक दिए गए थे। मगर, आज बहुत काफी खुशी हो रही है। पांच अगस्त को लेकर नगर में प्रसाद व दीपक भी जलाएंगें।