ओगटी गांव के मुख्य रास्तों पर जलभराव हैं। गंदगी के बीच से ही लोगों को गुजरना पड़ रहा है। स्कूली बच्चे भी परेशान हैं। शिकायतों के बाद भी समस्या जस की तस है। लोगों के मकान गिरने की नौबत आ गई है।
जिला प्रशासन की अनदेखी के चलते ओगटी गांव के लोगों का मार्गों पर हुए जलभराव से जीना मुहाल हो गया है। गंदे पानी के बीच से होकर लोगों को गुजरना पड़ता है। संक्रामक बीमारियां फैली हुई है। शिकायतों के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
गांव के सूरजीत सिंह ढाका कहना है कि जल निकासी कराने के लिए कई बार जिला प्रशासन को शिकायत की, लेकिन इस ओर किसी भी अधिकारी का ध्यान नहीं है। लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
जयभगवान कहते है कि बरसात के होते ही तालाब का पानी मार्गों पर आ जाता है जो कई-कई दिनं तक नहीं निकलता है। संक्रामक रोग फैला हुआ है। गंदे पानी से ही लोगों को गुजरना पड़ता है।
शीशपाल ने कहा गंदे पानी ने नरक से भी बदतर जीवन कर दिया है। स्कूली बच्चों भी गंदे पानी से होकर गुजरते है। हरपाल सिंह ने कहा गांव पर जिला प्रशासन का ध्यान नहीं है। शिकायतों के बाद भी कोई अधिकारी यहां आना पसंद नहीं करता है। ग्राम सचिव ही जांच कर अपनी रिपोर्ट भेज देता है, लेकिन समस्या जस की तस है।
रामनिवास का कहना है कि जल भराव की समस्या हर वर्ष उत्पन्न हो जाती है। समस्या का कोई समाधान नहीं निकल रहा है। शिकायत करके गांव के लोग थक चुके है। अब बस आंदोलन करना बाकी रह गया है।
कृष्णवीर ने कहा कई बार चंदा एकत्र करके मार्गों से पानी को निकलवाया, डीएम गांव में आना मुनासिब नहीं समझते।ग्राम प्रधान पीतम सिंह ने कहा जल निकासी की शिकायत बीडीअो समेत जिलाधिकारी से कर चुके हैं, कोई समाधान नहीं हुआ।