फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Baghpat News: यमुना में कटान जारी, किसानों की बढ़ी परेशानी

विज्ञापन
विज्ञापन
बागपत/छपरौली। यमुना में जलस्तर भले ही कम हो गया, मगर कटान तेजी से हो रहा है। किसानों की फसल यमुना में समा रही है। 1200 बीघा फसल यमुना में समाने से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने कटान रोकने के लिए यमुना किनारे ठोकरें लगाने की मांग की है।
विज्ञापन

यमुना का जलस्तर बढ़ने से कटान शुरू होने पर किसानों की फसल यमुना में समा गई थी। यमुना में सोमवार को 50 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस समय यमुना का जलस्तर 210.5 मीटर चल रहा है। अब जलस्तर कम हो रहा है लेकिन कटान अभी जारी है। कटान के कारण शबगा व जागौस गांव में किसानों की 1200 बीघा फसल यमुना में समा गई। इसकी वजह से किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
किसानों की ज्वार, सब्जी व ईख आदि फसलों के यमुना में समा जाने से पशुओं के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है। किसानों के सामने परिवार का पालन पोषण करने की समस्या हो रही है। इसके अलावा छपरौली, नांगल, फैजपुर निनाना, निवाड़ा, सिसाना, बागपत का पुराना कस्बा, काठा, पाली, सांकरौद, सुभानपुर व मवीकलां गांव में भी कटान होने के कारण किसानों की फसल प्रभावित हुई है।
विज्ञापन



शबगा में डेढ़ किलोमीटर अंदर घुसा पानी
ग्रामीण विनीत, ओमपाल व महाबीर ने बताया कि यमुना से शबगा की दूरी साढ़े तीन किलोमीटर है। वर्ष 2022 में भी पानी गांव के अंदर आ गया था और इस बार भी डेढ़ किलोमीटर तक पानी अंदर आ गया। इससे ग्रामीणों के घरों तक पानी पहुंच गया था और उनके घर भी गिरने की कगार पर पहुंच गए हैं।


ठोकरें लगाने से रुकेगा कटान
ग्रामीण सुमित व सुभाष ने बताया कि यमुना में कटान रोकने के लिए प्रशासन को ठोकरें लगानी होंगी, तभी यह कटान रुक सकता है। हर वर्ष पानी अधिक आने के कारण कटान होने से किसानों की फसल यमुना में समा जाती है। इससे किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो जाता है, इसलिए स्थायी समाधान के लिए ठोकरें लगवानी चाहिए।


करोड़ों रुपये का नुकसान, प्रशासन से मदद की आस
ग्रामीणों रविंद्र, विजयपाल व संजीव ने कहा कि करोड़ों रुपये की फसल यमुना मेें समा गई है। अब प्रशासन से ही आर्थिक मदद की आस है क्योंकि आर्थिक मदद होने के बाद ही उनके नुकसान की भरपाई हो सकती है। कई परिवारों के पास तो खेती करने के लिए जमीन तक नहीं बची है। अब जलस्तर कम होने के बाद ही खेती की जा सकेगी।



सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिए शुरू किया कार्य

सिंचाई विभाग के कर्मियों ने भी जलस्तर कम होने के बाद शबगा व जागोस गांव में कटान को रोकने के लिए यमुना किनारे बल्ली लगानी शुरू कर दी है और वहां मिट्टी से भरकर बोरे रखे जा रहे हैं ताकि यमुना का जलस्तर बढ़ने से कटान न हो सके और किसानों की फसल यमुना में न समा सके। इसके अलावा अन्य गांवों में जहां कटान हुआ है, वहां भी कार्य शुरू कर दिया है। खेतों में बल्ली व मिट्टी से भरे बोरे रखकर घेराबंदी की गई है।


- यमुना में कटान के कारण किसानों की फसल यमुना में समा गई है। इसकी वजह से किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है और उनके सामने परिवार का पालन पोषण करने में परेशानी हो रही है। -अंकित, नांगल
- कटान से शबगा व जागोस गांव में अधिक नुकसान हुआ है। किसानों की ईख, ज्वार व सब्जी की फसल यमुना में समा गई है। प्रशासन को सर्वे कराकर मुआवजा देना चाहिए। -साहिब चौधरी, छपरौली
- तीन साल बाद यमुना का जलस्तर बढ़ने से किसानों की मेहनत यमुना में समा गई है। किसानों ने दिन-रात मेहनत करके फसल की बुआई की थी। -अंसार अली, बागपत
- यमुना का जलस्तर बढ़ने से लोगों के घरों व खेतों में पानी घुस गया था। अभी दलदल बनी हुई है और किसान खेतों तक नहीं जा पा रहे हैं। -जयकिशन


वर्जन

- शबगा व जागोस में अधिक कटान के कारण यमुना में किसानों की जमीन समा गई। किसानों को मुआवजा देने के लिए सर्वे किया जा रहा है। जलस्तर कम होने के बाद कटान रोकने के लिए यमुना के किनारे बल्ली व मिट्टी से भरकर बोरे रखे जा रहे हैं। रजनीश कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें