लगातार दोहन के कारण जिले में भूजल का स्तर 110 फीट तक पहुंच गया
जल संरक्षण के प्रयास में जुटे लोगों की मानें तो आने वाली पीढ़ी भुगतेगी खामियाजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिले में भूजल का स्तर लगातार गिर रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो भूजल का स्तर प्रतिवर्ष 60 से 70 सेंटीमीटर गिर रहा है। लगातार दोहन के कारण भूजल का स्तर 110 फीट तक पहुंच गया है। यही वजह है कि अत्यधिक दोहन होने के कारण जिले के ब्लॉक डार्क जोन घोषित कर दिए गए है। शहर से देहात तक भूजल की बर्बादी की जा रही है। जल संरक्षण की दिशा में काम कर रहे लोगों का कहना है कि अगर लोग नहीं संभले तो आने वाली पीढ़ी के लिए मुश्किलेें खड़ी हो सकती हैं।
जल पुुरुष राजेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार को जल बचाने के लिए जल साक्षरता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करना चाहिए। भूजल बचाने के लिए नियम भी लागू करना चाहिए। लोगों को चाहिए कि जल का कम से कम और जरूरत के हिसाब से दोहन करें। भूजल की बेवजह बर्बादी से भविष्य में पेयजल की बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। लोगों को जल संरक्षण के लिए आगे आना होगा।
दोआबा पर्यावरण समिति के चेयरमैन डॉ चंद्रवीर सिंह का कहना है कि जिले का भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। लोगों को पानी की कीमत समझनी होगी। अगर लोग नहीं संभले तो 25 साल बाद बागपत में रेगिस्तान जैसे हालात पैदा हो जाएंगे। उद्योगों को गंदे पानी को रि-साइकिल कर प्रयोग करना चाहिए। पानी की सबसे बड़ी समस्या चौगामा क्षेत्र में है। पानी बचाकर ही जीवन को बचाया जा सकता है।
ग्रामीण पर्यावरण समिति के चेयरमैन कृष्णपाल सिंह का कहना है कि समिति की ओर से गांव के तालाबों का जीर्णोद्धार कराया गया। ग्राम पंचायतों में बैठक कर ग्रामीणों को पानी उपयोगिता के बारे में जागरूक किया गया। लोगों को जल संरक्षण की जानकारी दी कि जितनी जरुरत है उतना ही उपयोग करें। तालाब जल संरक्षण का प्रमुख स्रोत है। लोगों को पानी बचाने के लिए तालाबों को जिंदा रखना होगा।