फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कविताओं से हिंदी को शिखर पर ले जाना चाहते हैं विनीत चौहान

विज्ञापन
विज्ञापन
कविताओं से हिंदी को शिखर पर ले जाना चाहते हैं विनीत चौहान
विज्ञापन

बागपत। कवि विनीत चौहान ने अपनी कविताओं के माध्यम से हिंदी भाषा के उत्थान के लिए कार्य किया। वह रेल और वित्त मंत्रालय में हिंदी सलाहकार के पद पर रहे हैं। वह कहते हैं कि हिंदी सबको बोलनी, पढ़नी और सीखनी चाहिए। मातृभाषा की उन्नति से ही देश का उत्थान होगा।
किरठल गांव में जन्मे और राजस्थान के अलवर में रसायन विज्ञान के शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए विनीत चौहान वीर रस के जाने-माने कवि हैं। उन्होंने अपनी ओज की कविताओं से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। हिंदी देश की मातृभाषा है। देश में प्रचलित अन्य भाषाओं को भी सीखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन हिंदी को सीखना, पढ़ना और बोलना भी अनिवार्य किया जाना चाहिए। हिंदी से देश की पहचान है। कवि सम्मेलनों में भी हिंदी का स्तर सुधर रहा है। उनकी कोशिश है कि देश के हिंदी साहित्यकारों और कवियों के साथ मिलकर वह भाषा को शिखर पर ले जाने का कार्य करें।
विज्ञापन

विनीत चौहान की पुस्तकें
अग्नि मंथन, स्वर अहसासों के, गर्जन गुंजन, बहुत हो चुका, जयघोष आदि। इसके अलावा उनकी कविताओं की सीडी ‘देश की आवाज’ को भी सराहना मिली है।
चौहान को मिले सम्मान
मध्य प्रदेश का राष्ट्र चारण, जयपुर का अभय पारिक, शारदा सम्मान, उज्जैन में श्रीकृष्ण सरल सम्मान, गोपाल सिंह नेपाली सम्मान, गंगाश्री सम्मान, मैनपुरी का त्रिवेणी सम्मान, ओजश्री, देहरादून में काव्य गौरव सम्मान, वीर सावरकर सम्मान, कैप्टन मनोज पांडेय सम्मान, कीर्तिमान सम्मान, विक्रमादित्य सम्मान और राजस्थान गौरव।
विज्ञापन

बहुत हो चुका के अंश...
इसलिए लड़ाई वहां करो, जो अपने कुल के द्रोही हैं
ये बंदूकें उधर करो जो इस घर के विद्रोही हैं
आओ भ्रष्ट व्यवस्था पर सारे मिलकर हल्ला बोलें
गोदामों में बंद पड़ा उस गेहूं का ताला खोलें
नहीं खून की नदियां हों अब सिर्फ दूध की धार बहे
एक डाल के पंछी हम, ऐसा पूरा संसार कहे
हम नए युग का यहां निर्माण करने चल पड़े हैं
राष्ट्रभक्तों का खुला आह्वान करने चल पड़े हैं
जयद्रथों छिप लो मगर, है अंत निश्चित ही तुम्हारा
पार्थ फिर गांडीव ले संधान करने चल पड़े हैं
हम कर्जदार हैं नाना के, जो रोटी और कमल लाए
वे घाव अभी तक जिंदा हैं, जो वीर कुंवर सिंह ने खाए
जो शीश दान कर चले गए, हम गर्वित हैं उन वीरों पर
रानी का पल्लू पर पूज्य, जिससे बांधा वह दामोदर
किसने क्या कहा
स्वर्गीय गोपाल दास नीरज ने कवि विनीत चौहान के विषय में कहा था कि उनकी कविताएं मैने सुनी भी हैं और पढ़ी भी हैं। विनीत की कविताएं चिंतन प्रधान होने के कारण पाठकों और श्रोताओं में ऊर्जा का संचार ही नहीं करती, बल्कि हमें सोचने समझने के लिए विवश भी करती हैं।
हिंदी कविता के दम पर विदेश यात्राएं
विनीत चौहान ने हिंदी कवि सम्मेलनों में भाग लेने के लिए अब तक इंग्लैंड, नार्थ आयरलैंड, मस्कट, ओमान, भूटान समेत अन्य देशों की यात्राएं की हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें