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UP: बागपत में चार हजार साल पुरानी सभ्यता छिपी होने के मिले संकेत, दो हजार साल पुराने मिट्टी के खिलौने मिले

Fri, 31 Oct 2025 09:58 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, बागपत

सार

Baghpat News: दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. शुभम केवलिया ने शुक्रवार को चार घंटे खंडवारी का भ्रमण कर मृदभांड एकत्रित किए। प्रोफेसर ने दावा किया कि खंडवारी महाभारतकालीन धरोहर है। यहां पर लंबे समय तक मानव बस्ती रही है। 
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सिसाना गांव में खंडवारी क्षेत्र में प्राचीन दीवार की जांच करते दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. श - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सिसाना गांव के जंगल में स्थित खंडवारी का इतिहास धीरे-धीरे लोगों के सामने आने लगा है, यहां दो से चार हजार साल पुरानी गुप्त और उत्तर गुप्तकालीन सभ्यता छिपे होने के संकेत मिले हैं। शुक्रवार को खंडवारी पर पहुंचे दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. शुभम केवलिया ने छात्र हर्षित चार घंटे भ्रमण कर मृदभांड एकत्रित किए। उन्होंने खंडवारी को महाभारतकालीन धरोहर बताया।
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सिसाना गांव के जंगल में खंडवारी पर खोदाई के बाद प्राचीन दीवारें दिखाई दी। इसकी वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने मंदिर होने का दावा कर पूजा अर्चना शुरू कर दी और मेरठ से पुरातत्व सर्वेक्षण की तीन सदस्यीय टीम ने भी खंडवारी पहुंचकर मृदभांड और हड्डियां एकत्रित कीं। वहां मिली ईंटों और मृदभांड को देखकर उन्होंने गुप्तकालीन सभ्यता होने का दावा किया। इसके बाद से प्राचीन दीवारों को देखने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है।
 

शुक्रवार सुबह दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. शुभम केवलिया वहां पहुंचे। उन्होंने दीवारों में लगी ईंटें देखीं। खंडवारी पर भ्रमण के दौरान उन्हें पेंटेंड ग्रेवेयर यानी चित्रित धूसर मृदभांड और दो हजार साल पुराने मिट्टी के खिलानै समेत अन्य मृदभांड मिले। इससे यहां लंबे समय तक मानव बस्ती होने की बात पुख्ता हो रही है। प्रोफेसर ने बताया कि चित्रित धूसर मृदभांड दो से चार हजार साल पुरानी सभ्यता होने की तरफ इशारा कर रहे हैं।
 
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दीवार गुप्त और उत्तर गुप्त कालीन ईंटों का ढांचा
प्रोफेसर डॉ. शुभम केवलिया ने सिनौली साइट पर पीएचडी की है और लाक्षागृह, कुर्डी, बामनौली के अलावा अन्य साइटों का भ्रमण भी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि खंडवारी में मिलीं दीवारें मंदिर या फिर कुएं की नहीं कह सकते। ये दीवारें गुप्त या फिर उत्तर गुप्तकालीन ईंटों का ढांचा है। इसका अध्ययन करने के बाद ही विस्तार से बताया जा सकेगा।
 
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