2013 में जब्त की गई थी पिस्टल
मामले के अनुसार 11 मई 2013 को गांव करौरा निवासी किशनपाल ने पुलिस को तहरीर दी थी। आरोप था कि टक्कर की नगला गांव निवासी मनोज और अमित ने उनके भाई पप्पू, भतीजे विकास और नौकर शंकर के साथ गाली गलौज कर मारपीट की और लाइसेंसी पिस्टल से फायरिंग की।
पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचक उपनिरीक्षक उदयवीर सिंह ने आरोपी मनोज और अमित को गिरफ्तार किया और पिस्टल बरामद कर ली। आरोपी अमित की लाइसेंसी पिस्टल को थाने के मालखाने में जमा कराया गया था।
पिस्टल रिलीज कराने पर हुआ खुलासा
बाद में अदालत में सुनवाई के दौरान अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने मनोज और अमित को दोषमुक्त कर दिया। इसके बाद अमित ने अपनी पिस्टल वापस लेने के लिए न्यायालय में आवेदन किया।तभी पता चला कि थाने के मालखाने से पिस्टल गायब हो चुकी है। मामले की जांच क्षेत्राधिकारी शिकारपुर ने की। जांच में तत्कालीन हेड मुहर्रिर विजयपाल को दोषी मानते हुए रिपोर्ट वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भेजी गई।
सरकारी खजाने में जमा कराई गई कीमत
जांच के बाद विजयपाल को पिस्टल की सरकारी कीमत 60 हजार 426 रुपये जमा कराने के निर्देश दिए गए। 18 दिसंबर 2021 को विजयपाल ने यह राशि सरकारी खजाने में जमा करा दी थी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई रिपोर्ट
इसके बाद वर्ष 2023 में अमित ने उच्च न्यायालय में अपील की। न्यायालय ने 26 मार्च 2026 को आदेश पारित करते हुए कहा कि तत्कालीन हेड मुहर्रिर विजयपाल ने ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरती और पिस्टल गुम होने की घटना हुई।
इसके आधार पर सेवानिवृत्त हेड मुहर्रिर विजयपाल निवासी गांव हेवा, थाना छपरौली, जिला बागपत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
क्षेत्राधिकारी शिकारपुर शशांक श्रीवास्तव ने बताया कि ड्यूटी के दौरान लापरवाही करते हुए पिस्टल गुम करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।