फूस वाली मस्जिद में बड़ौत और तहसील क्षेत्र के उलेमा की बैठक में विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के नेताओं से न मिलने का फरमान सुनाया और चुनावी माहौल में राज नेताओं से दूरी रखने का निर्णय लिया।
शहर इमाम मौलाना आरिफ उल हक ने कहा कि नेताओं के लिए फूंस वाली मस्जिद के दरवाजे बंद रखे जाएंगे। उलेमा किसी भी सियासी दल के नेता से बात नहीं करेंगे। मस्जिद का जिले में एक मुकाम है। उन्होंने कहा फूंस वाली मस्जिद एक गैर राजनीतिक है और ये सियासत नहीं बल्कि इस्लामिक तालीम की जगह है।
इसलिए चुनाव के दौरान अगर किसी भी सियासी दल के नेता या पदाधिकारी फूंस वाली मस्जिद में पहुंचेंगे तो कोई भी बड़ा पदाधिकारी उससे नहीं मिलेगा। ताकि चुनाव में कोई भी दल अपना जाति लाभ उठाने की कोशिश न कर सके।
उन्होंने कहा चुनाव में कुछ राजनीतिक दल के नेता मुस्लिम धर्म के रहनुमाओं से अपने पक्ष में कुछ कहलवाने का प्रयास करते हैं। इसे देख उलेमा ने फैसला किया है कि वह चुनाव में राज नेताओं से दूरी बनाए रखेंगे।
इसमें मुसलमानों से भी अपील की वे इमाम पर दबाव न डाले और खुद भी बदनामी से बचने की कोशिश करें। इसमें मौलाना रियाज, कारी साबिर, हाफिज मुस्तकीम, मौलाना मोहम्मद, हाफिज आबिद, मौलाना इसरार, कारी इरशाद आदि रहे।