बागपत। किसानों की पैदावार बढ़ाने के लिए खेकड़ा के कृषि विज्ञान केंद्र में हाईटेक नर्सरी जरूर बनाई गई। मगर, सब्जियों की पौध पर शोध को लेकर संकट आ गया है। वहां सिंचाई के लिए पानी को लेकर दो विभाग आपस में भिड़ रहे हैं। विवाद भी इतना ज्यादा बढ़ गया कि डीएम और उपनिदेशक के पास तक पहुंच गया है।
खेकड़ा के कृषि विज्ञान केंद्र में सालभर पहले हाईटेक नर्सरी का निर्माण किया गया था। इसके निर्माण पर एक करोड़ 28 लाख रुपये खर्च हुए। नर्सरी को जिला उद्यान विभाग को दिया गया। इस नर्सरी में सब्जियों की उन्नत किस्म की शोधित पौध तैयार करके किसानों को देनी है। उस पौध के सहारे किसानों को अच्छी पैदावार मिले और उनकी आमदनी को बढ़ाया जा सके।
वहां पौध तैयार करने के लिए एक हेक्टेयर में हाईटेक पॉलीहाउस बनाया गया है। इसमें तैयार होने वाली पौध पर पैदावार व रोग की स्थिति देखने के लिए शोध करने के लिए पांच बीघा जमीन है। पॉलीहाउस में फिलहाल मिर्च, गोभी समेत अन्य कई सब्जियों की पौध तैयार हो चुकी हैं। इसके बाद बाकी पौध तैयार करके किसानों को दी जाएंगी।
शोध पूरा होने से पहले ही जिला उद्यान विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों में खींचतान हो गई है। जिला उद्यान अधिकारी दिनेश अरुण ने सीडीओ, डीएम, उपनिदेशक, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विवि मोदीपुरम मेरठ के प्रसार निदेशक को पत्र भेजकर कहा कि फसल में सिंचाई के लिए उनको पानी नहीं दिया जा रहा। ऐसे में एक सप्ताह में फसल खराब हो जाएगी। इस तरह दोनों का विवाद अधिकारियों के पास पहुंच गया है और इसमें किसानों को मिलने वाली उन्नत किस्म की पौध भी फंस गई।
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-हमारे यहां गेहूं की फसल की काफी क्षेत्र में बुवाई की गई हैं। हमारे पास केवल एक ही नलकूप है और हम पहले अपनी गेहूं की फसल की सिंचाई करेंगे। उसके बाद संभव होगा तो नर्सरी के लिए पानी दिया जाएगा। तब भी हम अपना कोई कर्मचारी नहीं लगाएंगे। इसके लिए अपने अधिकारियों को पत्र भेजेंगे।
-डाॅ. लक्ष्मीकांत, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा
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-नर्सरी में पौध तैयार करके पांच बीघा जमीन में फसल में पैदावार व रोग की स्थिति देखी जाती है। उसमें सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जा रहा है। इसलिए अधिकारियों को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया गया है।
- दिनेश अरुण, जिला उद्यान अधिकारी