वैदिक मंत्रोचारण के साथ कराया तुलसी का विवाह
बागपत। शहर के मंदिरों देवोत्थान एकादशी पर माता तुलसी का विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। विधि विधान और वैदिक मंत्रोचारण से तुलसी विवाह कार्यक्रम संपन्न कराया गया। इसमें श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
बाबा जानकीदास मंदिर के पुजारी ज्योतिषाचार्य राजकुमार शास्त्री ने बताया कि देवोत्थान एकादशी पर भगवान शालिग्राम का विवाह माता तुलसी के साथ विधि विधान के साथ कराया गया। उन्होंने बताया कि भगवान शालिग्राम नारायण के ही स्वरूप हैं। भगवान की पूजा बिना तुलसी के अधूरी रहती है। विवाह माता तुलसी से कराने पर लोगों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। शारीरिक, मानसिक, आर्थिक तापों से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में बताया गया है कि विवाह कराने से पुण्य तो मिलता ही है इसके साथ दांपत्य जीवन अति उत्तम रहता है। वृंदा का सतीत्व भंग किया था। इसके बाद भगवान विष्णु को श्राप दें दिया, जिसके बाद वह पत्थर के बंद गए थे। यही पत्थर शालिग्राम के रूप में प्रसिद्ध हुए। तब भगवान विष्णु ने कहा कि वृंदा में तुम्हारे सतीत्व का सम्मान करता हूं। आज तुम तुलसी बनकर मेरे साथ रहोगी। जो मनुष्य कार्तिक शुक्ल एकादशी को तुम्हारे साथ मेरा विवाह करेगा उसकी प्रत्येक मनोकामनाएं पूरी होगी। श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया। भूपेंद्र शर्मा, राजेश गौतम, बबलू शर्मा, रोहताश शर्मा, सतीश कुमार, अमन गौतम, ओम गौतम, देवेंद्र गौतम, मनीष, सुबोध, कमलेश, भगवान देई, गीता, मुनेश, संतोष मौजूद रहे। इसके अलावा शहर के पक्काघाट और ठाकुर द्वारा मंदिर में भी माता तुलसी का विवाह कार्यक्रम हुआ।