क्षय रोग से ग्रस्त होने के कारण बच्चों को दूध पिलाने से डर रही मां
56 बच्चे स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में ऐसे, जिन्हें मां से मिला टीबी रोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। जनपद में कई महिलाएं रोजाना डॉटस सेंटर पर क्षय रोग की दवा खाने पहुंच रही है। इतना ही नहीं कई बच्चे भी टीबी ग्रस्त मां की चपेट में आने से क्षय रोग का शिकार बन गए है। उप जिला क्षय रोग डॉ. अजेंद्र मलिक ने बताया कि जनपद में इस समय लगभग 56 से अधिक बच्चे ऐसे है, जो टीबी ग्रस्त अपनी मां की चपेट में आने से टीबी रोगी हो गए थे। उनका उपचार कराया जा रहा है। इसे देख बेबस मां ने मन मारकर बच्चों को दूध पिलाना भी बंद कर दिया है।
केस नंबर-1
ढ़िकाना गांव की सरिता ने गत माह बच्चे को जन्म दिया। खुद क्षय रोग पीड़ित होने के कारण वह दूध पिलाने से डरती है। यहीं नहीं गोद में लेने या पास सुलाते समय अपना मुंह कपड़े से ढक लेती है।
केस नंबर-2
मलकपुर गांव की संतोष तीन-चार माह से टीबी की मरीज है। उसका एक वर्षीय बेटा है, लेकिन उसे डर लगा रहता है कि कहीं क्षय रोग की चपेट में बच्चा भी न आ जाए। इसलिए वह अपना मन मार कर अपने बच्चे को दूर रखी है।
केस नंबर-3
कोताना गांव की नसीमा का भी यहीं हाल है। नसीमा को पता लगा कि उसे टीबी है, उसके मन के अंदर बेचैनी सी है। उसे डर लगता है कि उसके दो नन्हे-मुन्ने बच्चे क्षय रोग की चपेट में न आ जाए, इसलिए वह मुंह पर कपड़ा ढक कर उनसे थोड़ी दूर रहकर बातचीत करती है।
महिलाओं को ज्यादा शिकार बना रहा क्षय रोग
स्वास्थ्य विभाग के आंकडे़ बताते है कि दो सालों में क्षय रोग से पीड़ित महिलाओं की संख्या पुरुषों की अपेक्षा बढ़ी है। वर्ष 2019 मेें क्षय रोग के 456 मरीज आए थे, जिनमें से 198 पुरुष, 218 महिलाएं और 40 बच्चे थे। वर्ष 2020 में क्षय रोग के मरीजों की कुल संख्या 872 थी, जिसमें से 398 पुरुष, 404 महिलाएं जबकि बच्चों की संख्या 70 थी। है। इसके बाद कोरोना संक्रमण के चलते कोरोना मरीजों की जांच नहीं हो पाई। सितंबर 2021 से अब तक कुल मरीजों की संख्या 556 है। इनमें से पुरुष 242, महिलाएं 314 और 35 बच्चे शामिल है।
धूल और धुंए से ज्यादा खतरा
डिप्टी सीएमओ डॉ. विजय बताते है कि धुल-धुंए में रहने वाली महिलाओं में क्षय रोग का खतरा ज्यादा रहता है। पति से भी वे चपेट में आ सकती है। दूध पिलाने और संपर्क से उनसे बच्चों को भी खतरा रहता है। समय से जांच व इलाज से खतरा दूर हो जाता है। उन्होंने बताया कि इसको लेकर केन्द्र सरकार पूरी गंभीर है। केन्द्र सरकार ने वर्ष 2025 तक क्षय रोग को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। योगी सरकार ने भी टीबी हारेगा-यूपी जीतेगा का नारा दिया है।