- शामली के मूल निवासी और बड़ौत से विधायक होने से केपी मलिक के सहारे दो जिलों को साधने का प्रयास
- पश्चिम के कई जिलों में मलिक खाप की नाराजगी भी मंत्री पद देकर दूर करने का प्रयास किया गया
- इन समीकरण के कारण योगेश धामा पड़े कमजोर, सांसद के साथ खींचतान व संघ में ढीली पकड़ भी बनी बाधा
अंकित चौहान
बागपत। योगी सरकार ने विधायक केपी मलिक को मंत्री बनाकर एक साथ दो जिलों व खापों को साधने की कोशिश की गई है। केपी मलिक मूलरूप से शामली के कुड़ाना गांव के रहने वाले है और वह बागपत के बड़ौत से विधायक है। उन्हें मंत्री बनाकर भाजपा ने दो जिलों के लोगों को खुश कर दिया है।
बड़ौत विधानसभा सीट से केपी मलिक लगातार दूसरी बार विधायक बने है। उनके पैतृक जिले शामली में भाजपा का एक भी विधायक नहीं बना है। इसलिए माना जा रहा है कि एक ही मंत्री पद से दो जिलों को साधने के लिए केपी मलिक को मंत्री बनाया गया है। चुनाव में मलिक खाप की नाराजगी भी खूब दिखाई दी। पश्चिम के कई जिलों में मलिक खाप की ठीक पकड़ है। ऐसे में केपी मलिक को मंत्री बनाकर मलिक खाप की नाराजगी भी कुछ कम करने की कोशिश की गई है।
उधर, मंत्री बनने के लिए केपी मलिक से ज्यादा बागपत से दूसरी बार विधायक बने योगेश धामा की मजबूत दावेदारी थी। उनका मंत्री बनना लगभग तय भी माना जा रहा था। मगर, शपथ ग्रहण से ठीक पहले शामली व बागपत दो जिलों व मलिक खाप वाले समीकरणों ने योगेश धामा की दावेदारी को कमजोर कर दिया। इसके साथ ही संघ में ढीली पकड़ व सांसद डा. सत्यपाल सिंह से खींचतान भी योगेश धामा के लिए मंत्री बनने में बाधा बन गई।