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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के अजितनाथ सभागार में बृहस्पतिवार को धर्मसभा में जैन संत विमर्श महाराज ने कहा कि आत्मा की सफाई होने के बाद आत्मा के दिव्य आसन में सत्य का देवता विराजमान हो जाता है। सत्य मानव जीवन का शृंगार है।
उन्होंने कहा कि सत्य को शब्दों की बोतलों में कैद नहीं किया जा सकता है। शब्दों के माध्यम से जो भी कहा जाता है, वह पूर्ण सत्य नहीं होता, क्योंकि शब्द जड़ है, मृत है, सीमित है। जब तक व्यक्ति वाह्य सत्य से परिचित नहीं होता, तब तक वह अंदर के सत्य से परिचय नहीं कर पाता। बाह्य सत्य अक्षरात्मक, गणितात्मक, घटनात्मक, भौगोलिक, ऐतिहासिक, जातीय, व्यवहारिक होता है। शब्द को सुनकर, कृत्य को देखकर, सत्य का निर्णय नहीं होता। सिद्धांत को पकड़ने वाला सत्य को नहीं पाता, सिद्धांत के अनुसार चलने वाला सत्य को प्राप्त करता है। इस मौके पर डॉ़ श्रेयांस जैन, महेंद्र जैन, मदन लाल जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, विवेक जैन आदि मौजूद रहे।