बड़ौत (बागपत)। आर्यिका प्रत्यक्षमति माता के देवलोक गमन पर जैन अनुयायियों ने शोकसभा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। दिगंबर जैन अतिथि भवन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में आर्यिका प्रत्यक्षमति माता के देवलोक गमन पर सकल जैन समाज व शहरके गणमान्य लोगों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि सभा का आरंभ मंगलाचरण व ण्मोकार मंत्र से किया।
इस मौके पर डॉ. श्रैयांस जैन ने कहा कि जन्म के साथ ही मरण भी निश्चित हो जाता है। जो भव्य आत्मा होती है, उनका तो मरण भी महा महोत्सव बन जाता हैं। इंसान को शरीर से कम मोह करना चाहिए। आर्यिका माता ने यही किया। उन्होंने आत्म साधना कर समाधि मरण कर अपनी मृत्यु को मृत्यु महामहोत्सव बनाया। माता के गृहस्थ जीवन के पुत्र बाल ब्रह्मचारी पंडित सुनील शास्त्री ने कहा कि माता ने बहुत घोर तपस्या की। उनको वचन सिद्धि की प्राप्ति थी जो वह बोल देते थी, सही हो जाता था। अतुल जैन ने कहा हमारा परम सौभाग्य रहा कि हमें माता का सानिध्य मिला। वह अतिथि भवन में विराजमान रही। रश्मि जैन ने माता को अपनी श्रद्धांजलि दी। सभा में अन्य वक्ताओं व सामाजिक संगठनों ने भी माता को श्रद्धांजलि दी। संचालन डॉ. आर के जैन ने किया। इसमें प्रवीण जैन, नवीन, सतीश, आदिश, भारत, विनेश, संदीप गीता, सुधा, कमलेश, कौशल आदि रहे।
अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी ने आर्यिका प्रत्यक्षमति माता के देवलोक गमन होने पर सत्यवती जैन धर्मशाला मंडी में श्रद्धांजलि सभा की। इसकी अध्यक्षता प्रधान सुभाष चंद जैन ने की। संचालन मुकेश जैन ने किया। इसमें महेंद्र जैन, जयपाल जैन, प्रेम चंद जैन, अशोक जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन आदि रहे।