बड़ौत। कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। जहां मरीजों से अस्पताल भरे पड़े हैं वहीं काफी मरीज बेड़ न मिलने के कारण अपने घर पर ही इलाज करा रहे हैं। इनमें ऐसे भी मरीज हैं जो सोशल मीडिया पर चल रही सलाह के अनुसार ही दवाई और ऑक्सीजन लेकर उपचार कर रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार यह ठीक नहीं है। बगैर चिकित्सकों की सलाह के उपचार कराना मरीजों को भारी पड़ सकता है। इनमें से कई को जान बचाने के लिए अस्पताल की तरफ दौड़ना पड़ रहा है। इस संबंध में चिकित्सकों से बात की गई तो सभी ने मरीजों को चिकित्सक की सलाह पर ही घर पर उपचार करने की सलाह दी है।
बिना सलाह के न लगाए ऑक्सीजन
- जिले में लगभग 3503 के करीब कोरोना एक्टिव केस हैं और 583 केस एक्टिव हैं। इनमें से तकरीबन 40 फीसदी मरीज घर पर इलाज करा रहे हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी को लेकर हा-हाकार है। घर पर इलाज करा रहे मरीज खुद ही ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदकर अपनी सांसों की डोर को लंबा करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि चिकित्सकों की सलाह है कि बगैर सलाह के इस प्रकार ऑक्सीजन लेना ठीक नहीं है।
होम आइसोलेशन में रखें इन बातों का ध्यान
- मरीज का ऑक्सीजन लेवल दिन में तीन बार से चार बार चेक करें।
- चिकित्सक की सलाह पर ही ऑक्सीजन सिलिंडर को अपडेट करना चाहिए।
- ऑक्सीजन देने से पहले मरीज का ऑक्सीजन लेवल जांचना चाहिए।
- ऑक्सीजन देने के साथ ऑक्सीमीटर में जैसे ही ऑक्सीजन की मात्रा 94 पर पहुंचती है तो ऑक्सीजन का प्रेशर चैक करना चाहिए कि कितने लेवल से 94 पर पहुंची है।
- उदाहरण के तौर पर यदि तीन नंबर के प्रेशर के साथ ऑक्सीजन लेवल 94 पहुंचता है, तो 10 मिनट बाद ऑक्सीजन प्रेशर का आधा से एक पाइंट तक कम करके ऑक्सीजन का लेवल 94 पर जांचना चाहिए। ऐसे ही ऑक्सीजन प्रेशर से ऑक्सीजन लेवल की जांच करते रहें।
बिना वजह और गलत तरीका पहुंचा सकता है नुकसान
बड़ौत। सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार का कहना है कि चिकित्सकों की सलाह पर ही मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट लेनी चाहिए। ऑक्सीजन और दवाई का बिना वजह या गलत तरीके से उपयोग जान जोखिम में डाल सकता हैं।