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खेकड़ा कोविड अस्पताल में एक महिला समेत दो की मौत, मौत का कारण आक्सीजन लेबल कम होना बताया गया, प्राइवेट अस्पताल में उपचार से राहत

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प्राइवेट अस्पताल में उपचार से राहत ना मिलने पर परिजन लाए थे कोविड अस्पताल
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एक दिन में तीन मौत से हड़कंप, मौत का कारण ऑक्सीजन लेवल कम बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा (बागपत)। खेकड़ा नगर स्थित कोविड अस्पताल में शनिवार को एक दिन में दो महिलाओं सहित तीन कोरोना मरीजों की मौत हो गई। सीएचसी अधीक्षक के मुताबिक इन कोरोना संक्रमित मरीजों का प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा था। राहत न मिलने पर परिजन यहां लाए थे। मौत का कारण ऑक्सीजन में कमी रही।
खेकड़ा नगर स्थित सीएचसी को एल टू कोविड अस्पताल 30 से अधिक कोरोना मरीज भर्ती है। इनमें से गांव निवाड़ा महिला सरवरी देवी (60) को शुक्रवार की रात सांस लेने में दिक्कत हो गई। ऑक्सीजन लेवल 40 पहुंच गया था। ऑक्सीजन सपोर्ट पर चार घंटे रहने के बावजूद उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रशासन अभी उसके अंतिम संस्कार के प्रक्रिया को पूरा भी नहीं कर पाया था कि सुबह आठ बजे बालैनी निवासी एक और मरीज गजेंद्र (45) को भर्ती कराने एंबुलेंस पहुंची। गजेंद्र को एंबुलेंस में ऑक्सीजन सपोर्ट पर लाया गया था। अस्पताल पहुंचते ही उसकी सांसे उखड़ गई। ऑक्सीजन लेवल 70 पहुंच गया था। इससे उसकी मौत हो गई। इसके अलावा गांव फखरपुर निवासी 90 वर्षीय बत्तो देवी को शनिवार की सुबह सांस लेने में दिक्कत हुई तो परिजनों ने उन्हें खेकड़ा के कोविड अस्पताल में भर्ती कराया। जहां ऑक्सीजन सपोर्ट के बावजूद भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। शाम करीब छह बजे उनकी मौत हो गई। परिजनों को सूचना देकर शव का पुलिस की देखरेख में अंतिम संस्कार कराया गया। शुक्रवार को अस्पताल में बड़ौत क्षेत्र के गांव बिजरौल निवासी कोरोना संक्रमित अमित कुमार की मौत हुई थी। दो दिन के अंदर अस्पताल में हुई इन चार मौतों से हड़कंप मचा हुआ है।
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कोविड अस्पताल के प्रभारी डॉ ताहिर का कहना है कि अस्पताल में इनमें केवल दो ही मरीज की मौत हुई है। दो मरीजों को तो यहां मृत हालत में लाया गया था। यह दोनों मृतक भी कोरोना संक्रमित थे। इसलिए इनके अंतिम संस्कार की सभी प्रक्रिया अस्पताल से पूरी की गई है। बताया कि अस्पताल में आक्सीजन पर्याप्त मात्रा में है।
ऑक्सीजन सपोर्ट भी नहीं बचा पाया जान
कोविड अस्पताल के प्रभारी डा ताहिर ने बताया कि स्वस्थ मनुष्य का आक्सीजन लेबल कम से कम 94 से 98 तक होता है। कोरोना का यह दूसरा स्ट्रेन मरीजों के फेफड़ों पर तेजी के साथ वार करता है। संक्रमण अधिकांश 40 वर्ष से ऊपर की आयु वाले लोगों को अपनी चपेट में लेता है। जिस मरीज की शारीरिक क्षमता अत्यधिक कमजोर हो जाती है, उसका ऑक्सीजन लेवल भी तेजी के साथ घटता चला जाता है। वह ऑक्सीजन लगाने के बाद भी अच्छे से सांस नहीं ले पाता है। 60 वर्षीय सरवरी देवी और 90 वर्षीय बत्तो देवी के मामले में ऐसा ही हुआ। उसका ऑक्सीजन लेवल घटकर 40 रह गया था। उसकी हालत बेहद खराब हो गई थी। चार घंटे ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने के बावजूद उसकी मौत हो गई।
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प्राइवेट अस्पताल की लापरवाही फिर उजागर
कोविड अस्पताल के प्रभारी डॉ ताहिर ने बताया कि जनपद में कोई भी प्राइवेट अस्पताल कोविड श्रेणी में नहीं है। साठ वर्षीय सरवरी देवी को शुक्रवार को सांस लेने में दिक्कत हुई थी। परिजनों ने उसे बड़ौत के आस्था अस्पताल में भर्ती कराया था। जांच में वह संक्रमित मिली थी। हालत अत्यधिक बिगड़ने के चलते चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया था। उसके बाद परिजन उसे कोविड अस्पताल में लाए थे। ऐेसे में सवाल उठता है कि नॉन कोविड अस्पताल कैसे संक्रमित लोगों की जिंदगी खतरे में डाल रहे है। शुक्रवार को ऐसा ही मामला बड़ौत के भोपाल नर्सिंग होम में सामने आया था। नॉन कोविड अस्पताल होने के बावजूद चिकित्सक कोरोना संक्रमित मरीज का इलाज कर रहे थे। पता चलने पर स्वास्थ्य विभाग ने जैसे ही उसे कोविड अस्पताल में भर्ती कराया, उसकी मौत हो गई। नर्सिंग होम संचालक से जवाब मांगा गया है।
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