बागपत। निकाह के पांच दिन बाद ही दहेज में कार की मांग पूरी नहीं होने पर विवाहिता की हत्या करने के मामले में न्यायाधीश ने पति व सास-ससुर को दस-दस साल कैद की सजा सुनाई है। उनपर 30-30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है और अर्थदंड जमा नहीं करने पर सजा को एक महीने के लिए बढ़ाया जाएगा।
जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल नेहरा और वादी के अधिवक्ता रामावतार शर्मा ने बताया कि तीन अप्रैल 2016 में मुजफ्फरनगर जनपद के जौला गांव निवासी शहजाद ने बागपत कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें वादी ने कहा था कि उसकी बहन सैययारा का निकाह 28 मार्च 2016 को निवाड़ा गांव के मुजम्मिल के साथ हुआ था। निकाह के बाद दहेज में कार की मांग की जाने लगी।
मांग पूरी नहीं होने पर तीन अप्रैल 2016 को उसकी बहन की फांसी लगाकर हत्या कर दी गई। उसे आत्महत्या दर्शाने का प्रयास भी किया गया था। जिसमें पुलिस ने मृतका के पति मुजम्मिल, सास परवीन, ससुर तौफीक, नंद मुस्कुराना और देवर रिजवान के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें पुलिस ने पति मुजम्मिल, सास परवीन, ससुर तौफीक के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
मुकदमे की सुनवाई पूरी होने पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव पांडेय ने मुजम्मिल, परवीन और तौफीक पर दोष सिद्ध कर दिया और उनको दस-दस साल कैद की सजा सुनाई। उन पर तीस-तीस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया।