इतिहास के हर पन्ने पर बागपत की अमिट कहानी है। रामायण के वाल्मीकि मंदिर, रावण के नाम पर बड़ागांव और महाभारत के लाक्षागृह के चिह्न आज भी मौजूद हैं। चर्चाएं तो खूब र्हुइं, फसाने भी बनते रहे, लेेकिन कभी जिले के पर्यटन स्थलों का ढंग नहीं बदला। सिस्टम ने आंख बंद कर ली और धीरे-धीरे इतिहास मिटता रहा।
पर्यटन स्थलों की बातें तो हुई। मगर यहां सड़कों का जाल नहीं बिछाया गया। लोगों को आने की जाने की सुविधाएं नहीं दी गई। यही वजह है कि दुश्वारियों के कारण दिल्ली से नजदीकियों के बावजूद भी पर्यटक कभी जिले की तरफ नहीं घूम सकें।