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खाप चौधरियों के मनमुटाव से बिखर रही किसानों की ताकत

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खाप चौधरियों के मनमुटाव से बिखर रही किसानों की ताकत
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औद्योगिक पुलिस चौकी पर धरने से फिर जगजाहिर हो गए मनमुटाव
देश खाप, बालियान, गठवाला और छपरौली चौबीसी अलग-अलग राह पर
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। पश्चिम उत्तर प्रदेश की खाप पंचायतों के चौधरियों के बीच मनमुटाव एक बार फिर जगजाहिर हो गया हैं। किसानों की ताकत बंट गई है। देश खाप के चौधरी किसान आंदोलन को लेकर तीसरे दिन दो धड़ों में बंट गए। शामली की गठवाला खाप पहले दिन समर्थन देने पहुंची, लेकिन इसके बाद आंदोलन में नजर नहीं आई है। बालियान खाप का समर्थन यूपी गेट पर है। अलग-अलग मोर्चे लेने से किसान आंदोलन की धार कमजोर पड़ रही है।
वेस्ट यूपी में बड़ौत की देश खाप चौरासी, मुजफ्फरनगर की बालियान चौरासी, शामली के लिसाढ़ की गठवाला खाप, छपरौली की चौबीसी खाप, भैंसवाल की बत्तीसा खाप बड़ी खाप पंचायतों में शामिल हैं। राठी खाप दोघट, निर्वाल, बेनीवाल, कुंडू, अहलावत खाप, नैन, ढाका खाप समेत अन्य खाप पंचायतें एकजुट होकर आंदोलन करती रही है। कृषि कानून को लेकर शुरू हुए आंदोलन में खाप पंचायतों की ताकत भी बंट रही है।
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यूपी गेट पर चल रहे धरने को भाकियू अध्यक्ष एवं बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत की अगुवाई में लाटियान खाप, अहलावत, बत्तीसा खाप के चौधरियों ने समर्थन दिया था। देश खाप ने बड़ौत में अलग मोर्चा खोल दिया। चौबीसी ने समर्थन दिया, लेकिन तीसरे दिन ही ताकत दो खेमों में बंटकर रह गई। गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन मलिक बुजुर्ग हैं, प्रतिनिधि के तौर पर उनके बेटे राजेंद्र मलिक ही पहुंचते हैं। राजेंद्र मलिक बड़ौत पहुंचे थे, लेकिन यूपी गेट पर जाने से परहेज किया। देश खाप ने भी यूपी गेट के धरने से अब तक किनारा ही किया है। खाप चौधरियों का मनमुटाव समय-समय पर जगजाहिर होता रहा है, लेकिन इसका सबसे बड़ा नुकसान किसान आंदोलन को हो रहा है। किसानों की ताकत बिखर रही है।
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