बागपत। विकास कार्यों के लिए बजट की भरमार है, मगर जिला पंचायत हो या गांव, कोई भी बजट खर्च करने को तैयार नहीं है। स्थिति यह है कि जिला पंचायत में पुराने दस करोड़ रुपये खर्च नहीं किए गए और दो करोड़ रुपये का बजट फिर मिल गया। इस तरह ही गांवों के लिए पांच करोड़ रुपये का बजट आया है और वहां भी पहले ही दो करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट पड़ा हुआ है।
जिला पंचायत में वित्तीय वर्ष 2024-25 का बजट अप्रैल में मिलना शुरू हो गया था। मगर, आठ महीने में इस बजट को खर्च नहीं किया जा सका। पहले जिला पंचायत अध्यक्ष व सदस्यों में खींचतान के कारण जिला योजना मंजूर नहीं हो सकी। उस पर बाद में मुहर लगी तो उसमें शामिल कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सके। अब अध्यक्ष और जिला पंचायत के अधिकारी इस बजट को खर्च करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
इस तरह जिला पंचायत में करीब दस करोड़ रुपये का बजट पहले ही पड़ा हुआ है। अब शासन से वर्तमान वित्तीय वर्ष की पंद्रहवें वित्त आयोग की आखिरी किस्त के दो करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह भी जिला पंचायत के खाते में पहुंच गए और इस तरह से बजट जमा होता जा रहा है और उसे खर्च नहीं किया जा रहा।