बड़ौत। नगर के दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे स्थित एक फार्म हाउस में बुधवार को द जाट रेजिमेंट की 11वीं बटालियन का पुनर्मिलन समारोह हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली व राजस्थान के सेवानिवृत्त सैनिकों ने हिस्सा लिया। सैनिकों ने पाकिस्तान के साथ वर्ष 1971 की जंग व अन्य ऑपरेशन में विजय के किस्से सुनाकर पुरानी यादों को ताजा किया। कार्यक्रम में वीर नारियों को सम्मानित भी किया गया।
पुनर्मिलन समारोह में यूपी, हरियाणा, दिल्ली व राजस्थान से सौ से अधिक सेवानिवृत्त सैनिक शामिल हुए। वीर चक्र से सम्मानित सेवानिवृत्त कर्नल हरीशचंद्र शर्मा ने वर्ष 1971 में पाकिस्तान के साथ हुई जंग का किस्सा बताते हुए कहा कि पूर्वी पाकिस्तान की एक पोस्ट पर उन्हें लड़ाई लड़ने की जिम्मेदारी मिली थी। वह सैनिकों की एक टुकड़ी के साथ नाव से पोस्ट की तरफ बढ़ रहे थे, तभी तूफान आ गया। सैनिकों का थोड़ा मनोबल कम हुआ तो उन्होंने जोशीला भाषण देकर सैनिकों में जोश भरने का काम किया। पोस्ट पर पहुंचने के बाद पाकिस्तान के सैनिकों के साथ जंग शुरू हुई और दोनों तरफ से गोलियां चलने लगीं।
उनके सीने पर एक गोली लगी, मगर जेब में पड़े सिक्के पर लगने से गोली की दिशा बदलकर बराबर से निकली गई। सीने में गहरा घाव होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और लड़ाई जीतने पर वीर चक्र से सम्मानित किया गया। इनके अलावा सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल बीडी डंगवाल ने नागालैंड में चलाए गए ऑपरेशन मंगल की सफलता के किस्से सुनाए। किस तरह से देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना आगे बढ़ते रहे। वहां वीर नारियों को शॉल ओढ़ाकर व प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर विजय मेहता, ब्रिगेडियर पीपीएस बाजवा, कर्नल प्रशांत शर्मा, सूबेदार दीपक दुहूण, सूबेदार मेजर बीर सिंह, सूबेदार मेजर रतन सिंह, पवन कुमार आदि उपस्थित रहे।