बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 41 दिवसीय शांति विधान में मंगलवार को श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ 120 अर्घ्य समर्पित कर भगवान चंद्रप्रभु की पूजा अर्चना की।
विधान में पंडित प्रदीप पीयूष जैन ने कहा की ईर्ष्या की ज्वाला में मनुष्य के सारे सद्गुण जलकर राख हो जाते हैं। ईर्ष्या की अग्नि परमाणु बम से भी विस्फोटक होती है, जो धार्मिक व्यक्ति को भी शैतान और राक्षस बना देती है। ऐसी आत्मा का विश्व के किसी धर्म में प्रवेश नहीं होता। ईर्ष्या परिवार में जहर घोल देती है। घर की सुख, शांति, समृद्धि सब कुछ छीन लेती है। उन्होंने कहा कि ईर्ष्या के परित्याग का एक मात्र उपाय भगवान की भक्ति है। जिसे नित्य नियम करने से मनुष्य के व्यवहार में प्रेम की भावना उत्पन्न होती। विधान में पंकज जैन, संदीप जैन, बादामी देवी जैन, सुनीता जैन, ललित जैन, नमन जैन, विशांत जैन, हिमांशु जैन, मुकेश जैन आदि उपस्थित रहे।